माता वैष्णो देवी यात्रा पर जाने से पहले सुन ले ये कथा

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 माता वैष्णो देवी

त्रिकूट पर्वत पर स्थित माता वैष्णो देवी(Vaishno Devi) हिन्दुओ के प्रसिद्द और पावनदायक तीर्थो में से एक हैं. माता वैष्णो देवी यहाँ तीन देवियो के साथ माँ काली ,माँ लक्ष्मी, माँ सरस्वती के साथ निवास करती हैं. कटरा से 12 किलोमीटर दूर 5,200 फ़ीट की ऊंचाई में त्रिकूट पर्वत पर माँ वैष्णो देवी का पावन तीर्थ स्थान हैं, भक्तो में ऐसी मान्यता हैं कि माँ वैष्णो देवी के मंदिर में आने वाले हर तीर्थयात्री की मुराद को माँ अवश्य पूरा करती हैं.

माँ वैष्णो देवी धार्मिक तीर्थस्थल होने के साथ साथ सर्वाधिक भ्रमण करने वाले तीर्थस्थानों में से एक हैं. माँ अपनी गुफा में पिंडी रूप में विराजमान होकर भक्तो की मनोकामना को पूरा करती हैं. माँ का एक नाम त्रिकुटा भी हैं , क्युकी माँ वैष्णवी विष्णु के अंश से उत्पन्न हुयी इसलिए इन्हे वैष्णो देवी भी कहते हैं.

Vaishno Devi Yatra

माँ वैष्णो देवी की यात्रा बहुत ही सरल हैं , वैसे तो जम्मू तक ही पहले ट्रेन की सुविधा थी ,जम्मू से कटरा तक लोग बस या टैक्सी से अपनी सुविधानुसार आते थे पर अब कटरा तक ट्रेन की सुविधा हो जाने से थोड़ा राह और सुगम हो गयी हैं . कटरा से मंदिर तक दर्शन के लिए लोग घोड़ा, खच्चर अथवा पैदल भी माँ वैष्णो देवी के दर्शन कर सकते हैं.

जिनके पास समय का अभाव हैं वे हेलीकप्टर द्वारा भी माँ वैष्णो देवी (Maa Vaishno Devi Yatra) के दर्शन कर सकते हैं. दर्शन से पूर्व आपको पर्ची बनवानी होती हैं बिना पर्ची के आप दर्शन नहीं कर सकते .बाण गंगा स्थित चेक इन पॉइंट से आपको चेक इन करना होता हैं पर्ची काटने के 3 घंटे तक ही आपकी पर्ची मान्य होती हैं इसलिए यह जरुरी हैं की आप यात्रा करने से पूर्व ही यात्रा की पर्ची बनवाये

Vaishno Devi helicopter price

वैष्णो देवी में हेलीकप्टर तक जाने की सुविधा के लिए आपको कटरा से ही हेलीकप्टर सुविधा मौजूद हैं, जिसमे आप हेलीकप्टर से सांझी छत तक हेलीकप्टर की सुविधा का आनंद ले सकते हैं, जिसमे पर व्यक्ति किराया 1700 रुपये हैं, यदि आपको वापसी का भी आवागमन करवाना हैं , तो आपको 2800 रुपया पर व्यक्ति खर्च करना होगा

माता वैष्णो देवी कथा

माँ वैष्णव के सम्बन्ध में जो धार्मिक और पौराणिक कथाये प्रचलित हैं(Maa Vaishno Devi Story), उनमे दो कथाये ही प्रमुख हैं, उनका विवरण नीचे दिया गया हैं:

माँ के प्रसिद्ध भक्त श्रीधर ने एक बार सभी देवियो को भोजन करने की सोची (Maa Vaishno Devi Story), माँ का आर्शीवाद से सभी कन्याये भोजन के लिए आ गयी, माँ वैष्णो देवी भी उन कन्याओं के समझ में बैठकर भोजन करें लगी , सब कुछ बिना बाधा के समपन्न हो गया, भोजन करने के बाद जब सभी कन्याये अपने घर चली गयी

तब माँ वैष्णो ने श्रीधर की पूरे गांव को भोजन करने आमंत्रण देकर आने को कहा वापसी में श्रीधर ने गुरु गोरखनाथ और उनके शिष्य बाबा भैरवनाथ को भी भोज पर आमंत्रण दे दिया .

पूरे गांव वाले आश्चर्यचकित हो गए. माँ वैष्णो देवी ने सभी को एक पात्र से भोजन कराना शुरू कर दिया , लेकिन बाबा भैरव नाथ ने मांस भक्षण खाने की इच्छा प्रकट की माँ वैष्णो ने कहा ये ब्राह्मण की रसोई हैं यहाँ , मांस नहीं बन सकता , पर बाबा भैरवनाथ ने जिद्द नहीं छोड़ी, बाबा भैरवनाथ ने माँ वैष्णो  कन्या को पकड़ना चाहा और माँ उसके कपट को जानकार वायुरूप में माँ त्रिकूट पर्वत पर उड़ चली माँ की रक्षा के लिए हनुमान जी उनके साथ थे ,

रास्ते में हनुमान जी को प्यास लगने पर माता ने बाण चलकर पहाड़ से जलधारा निकाली , हनुमान जी ने पानी पीकर प्यास बुझाई और माता ने अपने केश उसमे धोये, और इसी स्थान को बाणगंगा के नाम से जाना जाता हैं.

Maa Vaishno Devi,माँ वैष्णो देवी फोटो

माँ त्रिकूट पर्वत पर गुफा के अंदर पहुंच गयी, भैरवनाथ भी माँ के पीछे पीछे पहुंच गया हनुमान जी ने भैरवनाथ को बताया की तू जिस कन्या के पीछे पड़े हो वो आदिशक्ति जगदम्बा हैं, पर भैरवनाथ ने बात नहीं मानी माँ गुफा के दूसरी तरफ से रास्ता बनाकर निकल पड़ी , यह स्थान अर्ध कुमारी ,गर्भजून या ,आदिकुमारी के नाम से प्रसिद्ध हैं

यहाँ अर्ध कुवारी से पहले माँ की चरण पादुकाएं भी हैं जहा उन्होंने भैरव नाथ को देखा था .माँ गुफा के अंदर चली गयी बाहर हनुमान जी भैरव के साथ युद्ध करने लगे , लड़ते लड़ते जब हनुमान जी की शक्ति क्षीण होने लगी तब माता ने गुफा से बाहर निकलकर भैरव से युद्ध किया और उसका मस्तक काट डाला , माँ जानती थी भैरवनाथ ये सब मोक्ष की इच्छा हेतु कर रहा हैं,

भैरवनाथ ने जब माँ से क्षमा की तो माँ ने उसे जन्म मृत्यु के चक्र से मुक्त कर वरदान दिया की मेरे दर्शन के पश्च्यात जब तक भक्त तुम्हारे दर्शन नहीं कर लेंगे तब तक यात्रा उनकी पूरी नहीं मानी जाएँगी .इसी बीच माँ वैष्णवी ने तीन पिंड का आकार लिया और सदा के लिए ध्यानमग्न हो गयी.अपने स्वप्न के आधार श्रीधर गुफा के भीतर गया और माँ की आराधना की माँ ने उसे दर्शन दिए , तभीसे श्रीधर और उसके वंशज माँ वैष्णो देवी की पूजा अर्चना करते आ रहे हैं.

माँ वैष्णव की अन्य कथा

त्रेता युग में तमिलनाडु के दक्षिणी समुद्र तट पर रामेश्वर में पंडित रत्नाकर के कोई संतान नहीं थी वर्षो पश्च्यात विष्णु के अंश के रूप में माँ वैष्णव(Maa Vaishno) ने पंडित रत्नाकर के घर में पुत्री रूप में अवतरित हुयी. 9 वर्ष के होने पर माता वैष्णव को यह पता चला कि, विष्णु ने भगवन राम के रूप में धरती पर अवतार लिया हैं , तो माता वैषणव राम को पति रूप में पाने के लिए आराधना करने लगी .

प्रभु श्री राम जब सीता कि खोज में आये तो उन्होंने बालिका को तपस्या करते हुए देखा , उसकी तपस्या देखकर प्रभु खुश हुए तो माँ वैष्णव ने उन्हें पति रूप में पाने की कामना की, तब श्री राम ने कहा इस जन्म में तो में एक पत्नी व्रत हूँ जब कलयुग में कल्कि अवतार लूंगा तब तुमसे निश्चित विवाह करूँगा , तब तक तुम त्रिकूट पर्वत पर जाओ वहाँ आरधना करो ,भक्तो के कष्ट दूर करो और जगत कल्याण का कार्य करो.

Yatra to Vaishno Devi walking time Maa Vaishno devi Images

जम्मू से 45 किलोमीटर दूर कटरा एक शहर हैं . जहा से वैष्णो देवी (Maa Vaishno Devi)की दूरी 12 किलोमीटर हैं, कटरा से वैष्णव देवी मंदिर जाने के लिए अनेक साधन उपलब्ध हैं, आप घोड़े , बैटरी वाली रिक्शा , आदि से जा सकते हो.कटरा से अर्द्धकुवारी की दूरी 6 किलोमीटर हैं, अर्ध कुवारी से माँ वैष्णो देवी की दूरी 6 किलोमीटर हैं.माँ वैष्णो देवी से बाबा भैरव बाबा का मंदिर 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं.

Mata Vaishno Devi live Darshan

माता रानी के वे भक्त जो चाहते हुए भी मंदिर नहीं जा सकते, अथवा वे भक्त जो जाने में असमर्थ हैं ,उन सभी के लिए यह खबर किसी चमत्कार से काम नहीं की आप घर बैठे माता रानी के आन लाइन दर्शन कर , और पूजा आरती के लाइव वीडियो( (Maa Vaishno Devi Live Darshan) देख सकते हो.

यह सब कंप्यूटर की विकसित टेक्नोलॉजी के जरिये ही संभव हुआ हैं, आपको बस अपने कंप्यूटर या लैपटॉप में जाकर के www.matavaishnodevi.org लाग- इन करना हैं फिर आप माता के पिंड रूप के दर्शन और माता रानी की आरती लाइव देख सकते हो.

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