Vat Savitri Vrat 2018 | वट सावित्री व्रत

भारतीय सभ्यता और संस्कृति में हर व्रत त्यौहार किसी न किसी पौराणिक कथा से जुड़ा जरूर होता हैं. वट सावित्री व्रत (vat savitri vrat )भी भारतीय महिलाओ का अपने अखंड सुहाग के प्रतीक का परिचायक हैं.महिलाये अपने पति और संतान की कामना हेतु इस व्रत को रखती हैं. वट सावित्री व्रत(vat savitri vrat) नारी के आदर्श सतीत्व का प्रतीक हैं. पुराणों में इसकी कथा विस्तार से उल्लिखित हैं

Vat Savitri vrat Puja Katha वट सावित्री पूजा कथा

सवित्री भद्र देश के राजा अश्वपति की एकमात्र कन्या थी , जब वह युवा हुयी तो वर की खोज में जाते हुए उसने निर्वासित और वनवासी राजा द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान् को देखकर अपने पति रूप में चुन लिया . इसके बाद वह अपने महल आ गयी, देवर्षि नारद द्वारा यह बताये जाने पर की सत्यवान अल्पायु हैं. उसकी आयु मात्र एक वर्ष ही शेष हैं,सावित्री के पिता और देवर्षि नारद ने उसे समझाया तो उसने कहा आर्य कन्याये एक बार ही वर चुनती हैं .

सावित्री का विवाह सत्यवान के साथ हो गया , समय के साथ वह दिन भी आ गया जब यम सत्यवान के प्राण लेने आ गए और जब वे सत्यवान के प्राण लेकर जाने लगे तो सावित्री भी उनके पीछे जाने लगी यम ने कहा तुम मेरे पीछे पीछे मत  आओ.

सावित्री ,सावित्री ने कहा आप हे प्रभु जहा मेरे पति जायेंगे वहाँ में जाउंगी यम ने बहुत मना किया पर सावित्री नहीं मानी .सावित्री ने कहा यह मेरा पति धर्म हैं , सावित्री की पतिव्रता और उसके धर्म से प्रसन्न होकर यम ने उसे एक एक करके वर दिए जिसमे यम ने सावित्री के अंधे सास ससुर को नेत्र ज्योति , उनका खोया हुआ राज पाट और सावित्री के पिता को सौ पुत्रो का वरदान दिया ,सावित्री फिर भी उनके पीछे पीछे जाने लगी यम ने कहा सावित्री सत्यवान को छोड़कर जो चाहो मांग लो, सावित्री ने कहा हे प्रभु यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं

तो मुझे सौ पुत्रो की माँ बनने का आशीर्वाद प्रदान करे , यम ने कहा तथास्तु तो सावित्री ने कहा प्रभु यह कैसे संभव हैं, आपने मुझे पुत्रवती होने का आशीर्वाद दे दिया और मेरे पति के प्राण लिए जा रहे हो .वचनबद्ध होने पर यम ने सत्यवान के प्राण वापस कर दिए . सत्यवान को नवीन आयु प्रदान की. सावित्री अपने पति के प्राण लेकर वापिस आ गयी.

Vat Savitri Puja Time वट सावित्री व्रत समय:

अमावस्या तिथि शुरू = 19:46 14 मई 2018
अमावस्या तिथि समाप्त = 17:17 मई 15 मई 2018

vat savitri vrat

 

Vat Savitri Puja Kaise Kare: वट सावित्री पूजन विधि :

वट सावित्री को माता सावित्री के साथ यमराज की भी पूजा करनी चाहिए,यमराज ने सत्यवान के प्राण वापिस करके उसे जीवन दान दिया था.मिटटी से सवित्री और सत्यवान की मूर्ति बनाकर उनकी पूजा अर्चना शुरू करे , निम्न मंत्र के साथ सावित्री देवी को जल अर्पित करे :

अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते।
पुत्रान्‌ पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तु ते॥

1-वट सावित्री के दिन महिलाओ को स्नान कर नए वस्त्र आभूषण पहनकर वट वृक्ष के नीचे पूजा करनी चाहिए

2-वट वृक्ष की जड़ में सावित्री और सत्यवान की मूर्ति को रखकर उन्हें लाल वस्त्र अर्पित करने चाहिए

vat savitri vrat images

3-देवी सावित्री को अक्षत रोली सिंदूर अर्पित कर उनकी पूजा करते हैं.

4-लाल मौली लेकर वट वृक्ष के चारो ओर लपेटते हुए वट वृक्ष की परिक्रमा करनी चाहिए .

5-पंडित जी से वट सावित्री की कथा सुननी चाहिए और उन्हें श्रद्धा अनुसार दक्षिणा देनी चाहिए

.6-बड़ो के पैर छूकर उनसे अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद लेना चाहिए.

7-फिर शाम को फलाहार का सेवन कर व्रत का परायण करना चाहिए.

Vat Savitri Vrat Ka Mahatw वट सावित्री व्रत का महत्व

वट का वृक्ष अर्थात बरगद का पेड़ बहुत विशाल होता हैं , वट के वृक्ष के नीचे ही महात्मा बुद्ध को बौधिसत्व प्राप्त हुआ था वट वृक्ष ज्ञान का प्रतीक भी माना जाता हैं.वट की लटकती हुयी लताये सावित्री का प्रतीक मानी जाती हैं, वट वृक्ष की जड़ में ब्रह्मा , बीच में विष्णु ओर ऊपरी ओर सामने के भाग में महादेव रहते हैं , त्रिदेव का स्थान हैं बरगद के पेड़ में , इसके नीचे बैठकर पूजा करने से साड़ी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

इसके अलावा जिन कन्याओं के विवाह में रुकावटे आ रही हैं वे बरगद के पेड़ में कच्चा दूध चढ़ाये और गीली मिटटी से माथे पर टिका लगाए ,बरगद के वृक्ष को नदी किनारे या किसी देव स्थान जैसे मंदिर में लगाना चाहिए , और रोज पानी से सींचना चाहिए ,और रोज वट के पेड़ को पानी से सींचना चाहिए वृक्ष जैसे जैसे बड़ा होता जायेगा घर परिवार में खुशिया आती जायँगी |

 

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