क्यों करते हैं परहेज ब्राह्मण लहसुन प्याज से

प्याज लहसुन के बिना आपको खाना स्वादिष्ट नहीं लगता होगा, पर ब्राह्मण वर्ग एक ऐसा समुदाय हैं जो खाने में लहसुन प्याज का प्रयोग नहीं करता हैं, यद्द्यपि आजकल ब्राह्मण इसका प्रयोग करने लगे है, पर हम सभी के मन में ये विचार तो आता होगा की ब्राह्मण लहसुन प्याज क्यों नहीं प्रयोग करता(why brahmins do not eat garlic and onions) , इसके पीछे क्या धार्मिक मान्यताये हैं या कोई और भी कारण हैं जिसकी वजह से ब्राह्मण प्याज लहसुन से परहेज करता हैं.

Classification Of Food According To Their Qualities गुणों के

आधार पर भोजन का वर्गीकरण

भोजन में हर प्रकार का गुण होता हैं उसके गुणों के आधार पर हम उसे तीन भागो में बाँट सकते हैं

सात्विक भोजन : सात्विक भोजन वह होता हैं जिसे खाने से व्यक्ति में शांति संयम , पवित्रता जैसे गुण आते हैं, क्यूकि कहावत सुनी होगी आपने जैसा खाओ अन्न वैसा हो मन,दूध ,दही , साग सब्जिया , दाल,पनीर ये सभी सात्विक भोजन की श्रेणी में आते है.

तामसिक भोजन : तामसिक भोजन जिसे खाने से व्यक्ति में अहंकार , विनाश करने की प्रवृति ,क्रोध जैसे अवगुण का जन्म होता हैं. राक्षस तामसिक भोजन ग्रहण करते हैं, जिस वजह से उनमे क्रोध विनाश करने के जैसे अवगुण जन्म लेते हैं.तामसिक भोजन मांस , मछली, मँदिरा,प्याज ,लहसुन.

राजसिक भोजन:ऐसा भोजन जो मनुष्य को स्फूर्ति और उत्तेजना प्रदान करता हैं, चाय , कॉफी, चटपटा मसालेदार भोजन ,पान ,राजसिक भोजन की श्रेणी में आता हैं.

 

क्यों नहीं करते ब्राह्मण लहसून प्याज का प्रयोग:

प्याज लहसुन तामसिक भोजन होने की वजह से व्यक्ति में क्रोध , अहम् , कामेच्छा को भी जन्म देता हैं , इस वजह से विधवाओं को इसका प्रयोग वर्जित किया गया है. हिन्दू धर्म के संस्कारो में लहसुन प्याज को तुच्छ भोजन माना गया हैं. जो व्यक्ति के मस्तिष्क को भी प्रभावित करता हैं इसलिए भी इसका सेवन ब्राह्मणो द्वारा वर्जित हैं .

एक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के समय जब अमृत को लेकर देवताओ और दैत्यों में घमासान मचा था , तब भगवान् विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण कर देवताओ को अमृत बाँट रहे थे तो राहु ने छल से देव का रूप धारण कर अमृत पान कर लिया ,इस बाँट की जानकारी होने पर भगवान् विष्णु ने सुदर्शन चक्र से राहु का सर धड़ से काटकर अलग कर दिया ,जिस वक़्त उसका सर धड़ से लग हुआ रक्त की कुछ बूंदे उसके सर से धरा पर गिरी ,और उसी से प्याज लहसुन की उत्पति हुयी ,जिस वजह से ब्राह्मण इसका प्रयोग करना वर्जित समझते हैं.इसका प्रयोग करने में उन्हें लगता हैं इसमें असुरो का वास हैं.

प्याज लहसुन खाने से ,अहंकार , कामुकता , विनाश , विद्रोह जैसे अवगुण जन्म लेते हैं,जिसे खाना ब्राह्मण वर्जित समझता हैं, जो तामसिक प्रवृति को जन्म देता हैं .

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