मोहनी एकादशी : सभी एकादशी में सर्वश्रेष्ठ

मोहिनी एकादशी (2018 Mohini Ekadashi)का व्रत हिन्दू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता हैं. श्री हरि को समर्पित यह व्रत पाप से मुक्त प्रदान करने वाला माना जाता हैं. इस दिन व्रती को विष्णु का स्मरण करते हुए ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का निरंतर जाप करना चाहिए .एकादशी का व्रत माह में दो बार आता हैं, पूर्णिमा के बाद और अमावस्या के बाद .

एकादशी हिन्दू पंचाग की ग्यारहवीं तिथि होती हैं. मोहिनी एकादशी को सभी पापो से मुक्त करने वाली एकादशी माना जाता हैं. मोहिनी एकादशी जैसा की नाम से ही स्पष्ट हैं, वैसाख माह में आने वाली यह एकादशी सभी मोह के बंधनो से मुक्त करती हैं. और मोह के बंधनो से मुक्त होकर व्यक्ति मोक्ष को प्राप्त करता हैं.

 

Mohini Ekadashi Importance

मोहिनी एकादशी के(Mohini ekadashi importance ) इतिहास को जानने के लिए समुद्र मंथन की कहानी को जाना जरुरी हैं. समुद्र मंथन के दौरान जब समुद्र से अमृत निकला तो देवो और असुरो में अमृत को लेकर विवाद छिड़ गया इस विवाद को शांत करने के लिए विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण कर लिया.

जिस दिन भगवान् विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया था वह दिन वैसाख एकादशी का दिन था , उसी दिन से एकादशी को मोहिनी एकादशी के रूप में मनाया जाने लगा.सभी पापो से मोह के बंधनो से प्राणी को मुक्त करने वाली यह एकादशी सभी एकादशी में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती हैं.

 

Mohini Ekadashi Vrat Katha In Hindi

मोहिनी एकादशी का व्रत की (Mohini ekadashi vrat katha)कथा इस प्रकार से हैं, प्राचीन काल में सरस्वती नदी के तट पर भद्रावती नाम की नगरी में धृतिमान नाम का महान राजा राज्य करता था. उसी नगर में धनपाल नाम का वैश्य भी रहता था. वह बहुत ही धर्मात्मा प्रवृति का था. वह हमेशा दान , सत्कर्मो के ही कार्यो में लगा रहता हैं. उसके पांच पुत्र थे ,सुमना , द्युतिमान ,मेधावी ,सुकृत, धृष्ट्बुद्धि. पांचवा पुत्र धृष्टबुद्धि पाप , कर्म के कार्यो में लगा रहता हैं. वह उस धन को पाप ,अधर्म के कार्यो में ही लुटा देता था, उसकी इसी प्रवृति से परेशान होकर उसके पिता ने उसे घर से निकाल दिया .

और जब वह घर से बाहर यहाँ वह भटकने लगा और भूख प्यास से व्याकुल हुआ तब वह महर्षि कौण्डिल्य के आश्रम में गया और अपने पापो के उद्धार के लिए मुनि से प्रार्थना करने लगा , महर्षि ने उसे मोहिनी एकादशी का व्रत करने के लिए कहा.मुनि ने मोहिनी एकादशी के व्रत का महत्व धृष्टबुद्धि को बताया कि मोहिनी एकादशी का व्रत करने से कई जन्मो के पापो से प्राणी मुक्त हो जाता हैं .इस व्रत को करने से धृष्टबुद्धि के विचारो और प्रवृति में सुधार आया और वह सत्कर्मो की और मुड़ा और उसके इन्ही अच्छे कर्मो की वजह से फिर उसने सदगति पायी .

 

Ekadashi Importance

एकादशी के व्रत का बहुत ही माहात्म्य हैं(Ekadashi importance). पुराणों में एकादशी के बारे में एक कथा हैं , कि श्री विष्णु के शरीर से एकादशी देवी का जन्म हुआ. एक बार श्री विष्णु मुर नामक राक्षस से युद्ध करते हुए थक गए , तब वे विश्राम के लिए बद्रिकाश्रम में चले गए .मुर ने जब निद्रा में लेते हुए श्री हरि को मारना चाहा, लेकिन श्री हरि के शरीर से एक तेज शक्ति पुंज देवी का उदय हुआ और उन्होंने मुर का वध कर दिया .

देवी के कार्य से प्रसन्न होकर विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि देवी आपका जन्म मार्गशीर्ष माह की एकादशी को हुआ हैं, इसलिए आपका नाम एकादशी होगा , और एकादशी के दिन मेरे साथ आपकी भी पूजा होगी. जो भी एकादशी का व्रत पूरी श्रद्धा के साथ करेगा उसे पापो से मुक्ति मिलेगी और मोक्ष की प्राप्ति होगी

Ekadashi in 2018

वर्ष 2018 में एकादशी की व्रत तालिका इस प्रकार से हैं, तिथियों में परिवर्तन हो सकता हैं.(ekadashi in 2018)

12 जनवरी : षटतिला एकादशी

27/28 जनवरी : जया/अजा एकादशी

11 फरवरी : विजया एकादशी

26 फरवरी : आमलकी एकादशी

13 मार्च : पापमोचनी एकादशी

27 मार्च : कामदा एकादशी
12 अप्रैल : वरुथिनी एकादशी

26 अप्रैल : मोहिनी एकादशी

11 मई : अचला (अपरा) एकादशी

25 मई पुरुषोत्तमी, कमला एकादशी

10 जून : पुरुषोत्तमी, कमला एकादशी

. 23/24 जून : निर्जला एकादशी

. 9 जुलाई : योगिनी एकादशी

23 जुलाई : देवशयनी एकादशी

7 अगस्त : कामिका एकादशी

21/22 अगस्त : पुत्रदा, पवित्रा एकादशी

6 सितंबर : जया/अजा एकादशी

20 सितंबर : पद्मा, जलझूलनी एकादशी

5 अक्टूबर : इंदिरा एकादशी

20 अक्टूबर : पापांकुशा एकादशी

3 नवंबर : रंभा (रमा) एकादशी

19 नवंबर : देवउठनी एकादशी

3 दिसंबर : उत्पन्ना एकादशी

18/19 दिसंबर : मोक्षदा एकादशी

 

Ekadashi Food

एकादशी का व्रत(Ekadashi Food) में फलाहार का ही प्रावधान हैं, इस दिन व्रत में अन्न का सेवन करने से व्रती नरक का गमी बनती हैं, इस व्रत में पयः लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए , चावल का इस व्रत में विशेष परहेज होता हैं. एकादशी के व्रत में फलाहार को लेकर आज हम आपको साबूदाने की खिचड़ी बताने जा रहे हैं.

साबूदाने की खिचड़ी

साबूदाना – 150 ग्राम

घी – 1.5 टेबल स्पून

हरी मिर्च – 2 ( बारीक कतरी हुई)

मूंगफली के दाने – 1 टेबल स्पून

पनीर – 70 ग्राम 

आलू – 1 मीडियम आकार का

अदरक – 1 इंच का टुकड़ा (कद्दूकस किया हुआ)

सैंधा नमक – स्वादानुसार

हरा धनियां – 1 टेबल स्पून (बारीक कतरा हुआ)

 

साबूदाने को भिगोकर रख दीजिये अब एक घंटा भिगोने के बाद आप उसमे बचा हुआ पानी छानकर साबूदाने को अलग रख दीजिये, आलू को छीलकर धो ले और अब उसे छोटे छोटे टुकड़ो में काटकर फ्राई कर लीजिये , पनीर को भी आलू की तरह काटकर फ्राई कर लीजिये . अब घी में मिर्च और अदरक डालकर उसे चलाइये अब इसमें साबूदाना , सैंधा नामक और काली मिर्च डालकर चलाइये और फिर मूंगफली को दरदरा पीसकर इसमें डाल दीजिये , अब इसमें फ्राई किया हुआ पनीर और आलू डाल दीजिये और, और इसे चलाते रहिये ताकि ये चिपके नहीं . पांच मिनट इस सामग्री को चलकर गैस बंद कर दीजिये और इसे धनिये से सजाइये .साबूदाने की खिचड़ी तैयार हैं.

 

फलो का रायता

यदि आप फलो से सम्बंधित कुछ बनाना चाह रही जैसे फ्रूट क्रीम या फलो का रायता तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं फलो का रायता .
मौसम के अनुसार या अपनी पसंद के फलो को लेकर आप रायता बना सकती हैं.
फल
केला
सेब
अनार
अंगूर
अन्नानास
2 बड़े कप दही को लेकर फेट दे और उसमे चीनी मिला दे , अब सारे फलो को अनार अंगूर को छोड़कर सभी को छोटे छोटे टुकड़ो में काट दे और दही में मिला दे अब इसमें बारीक़ पिसा हुआ इलायची पाउडर डाल दे, और फ्रीज में ठंडा करने रख दे , आधा घंटा ठंडा करने के बाद इसे बाहर निकाले और खाने के लिए परोसे.

मोहिनी एकादशी का व्रत अत्यंत श्रेष्ठ व्रत हैं इस व्रत को करने से मनुष्य कई जन्मो के पापो से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त होता हैं , इस व्रत के करने से न केवल मनुष्य का कल्याण होता हैं,अपितु वह श्री विष्णु की कृपा प्राप्त करता हैं, इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ विशेष फल प्रदान करता हैं.

 

 

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