माँ गंगा के मृत्युलोक में अवतरण का दिन हैं गंगा दशहरा

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गंगा दशहरा (Information about India Ganga Dussehra 2018) गंगा माँ के धरती पर अवतरण का दिन हैं.ऐसी मान्यता हैं इसी दिन माँ गंगा स्वर्ग से धरा की गोद में उतरी थी. गंगा दशहरा ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता हैं.इस वर्ष गंगा दशहरा 24 मई 2018 को मनाया जायेगा.

नारद पुराण में वर्णित हैं, ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की दशमी को माँ गंगा मृत्युलोक में धरती पर अवतरित हुयी थी. वही वराह पुराण में भी माँ गंगा के धरा पर अवतरण का समय ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी बताया गया हैं.

ज्येष्ठ मास उजियारी दशमी, मंगलवार को गंग
अवतरी मैया मकरवाहिनी, दुग्ध-से उजले अंग

Ganga Dussehra history

Ganga Dussehra 2018

माँ गंगा (Ganga Dussehra history) का धरती पर अवतरण कोई सामान्य घटना नहीं, महाराज सागर के साथ हजार पुत्रो के उद्धार के लिए उनके पौत्र महाराज भगीरथ ने गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए बहुत कठिन तपस्या की, ब्रह्म देव और भोलेनाथ (Bholenath)  की अनुकम्पा से गंगा के पृथ्वी पर पदार्पण का दुर्लभ कार्य संपन्न हुआ. गंगा अवतरण की कथा इस प्रकार से हैं ,अयोध्या में सगर नाम के राजा राज्य करते थे.उनकी दो रानियाँ थी एक रानी से उन्हें साठ हजार पुत्र थे , दूसरी रानी से उन्हें एक पुत्र था.राजा सगर ने अपना साम्राज्य के विस्तार के लिए अश्वमेघ यज्ञ का आयोजन किया.पर इंद्र उनका यज्ञ सफल नहीं होने देना चाहते थे, इसलिए उन्होंने यज्ञ के घोड़े को पाताल में जाकर कपिल मुनि के पास जाकर बांध दिया ,

कपिल मुनि समाधी में लीन थे . राजा सगर के साठ हजार पुत्र यज्ञ के घोड़े की तलाश में सब जगह गए पर उन्हें घोडा नहीं मिला , इसके बाद से पाताल गए , जहाँ कपिल मुनि के पास उन्होंने घोड़े को देखा जो घास चर रहा था , राजा सगर के पुत्रो को ग़लतफ़हमी हुयी , इस वजह से कपिल मुनि की समाधी टूट गयी , उनके तप की अग्नि से राजा सगर के साठ हजार पुत्र भस्म हो गए.

Ganga Dussehra 2018 images

यह बात उनके दूसरे पुत्र ने राजा सगर को बताई ,महाराज गरुड़ भी वहाँ मौजूद थे, उन्होंने राजा सगर को उनके पुत्रो की मुक्ति के लिए गंगा को धरा पर लाने का सुझाव दिया , राजा सगर और उनके पुत्र ने तपस्या की , पर यह सफल नहीं हो पायी , फिर सगर के वंशजो में राजा भगीरथ हुए, जिन्होंने गंगा को पृथ्वी पर लाने का निश्चय किया.राजा भगीरथ ने ब्रह्मा की तपस्याकी भगीरथ की तपस्या से ब्रह्मा प्रसन्न हुए , उन्होंने भगीरथ को गंगा को पृथ्वी पर भेजने का वरदान दिया, लेकिन उन्होंने कहा की गंगा का वेग इतना प्रबल हैं, की धरा उसे संभल नहीं पायेगी , उन्होंने भगीरथ को कहा की वे शिव की तपस्या करें, क्यूकि शिव ही गंगा के वेग को अपनी जटाओ में धारण करने में सक्षम हैं.

भगीरथ ने शिव की तपस्या की और उन्हें प्रसन्न किया , शिव ने गंगा के वेग को अपनी जटाओ में धारण किया, और गंगा शिव की जटाओ में उलझ गयी.भगीरथ ने शिव की तपस्या की शिव ने गंगा को अपने जटाओ से स्वतंत्र किया इसके बाद माँ गंगा हिमालय से होते हुए धरा पर आयी और उन्होंने राजा सगर के साठ हजार पुत्रो का उद्धार किया.

Ganga Dussehra celebrations

गंगा दशहरा बहुत ही पावन फलदायी दिन हैं, इस दिन दान पुण्य का बहुत महत्व हैं,(Ganga Dussehra Celebrations) इस दिन गंगा स्नान का भी बहुत पुण्य माना जाता हैं.गंगा पृथ्वी पर इस दिन अवतरित हुयी थी ,और शिव की जटाओ से ही उनका आगमन पृथ्वी पर सफल हुआ ,गंगा दशहरा के दिन शिव की पूजा भी मंगलमयी और पुण्यफलदायी मानी जाती हैं.इस दिन दान पुण्य का भी विशेष महत्व हैं.गंगा का पूजन करते हुए निम्न मंत्र का उच्चारण शुभ फलदायी माना जाता हैं.इस दिन शिव का जलाभिषेक करने का भी विशेष माहात्म्य हैं.शिव की पूजा करने से प्रसन्न होते हैं , और भक्तो की मनोकामनाओ को पूरा करते हैं.

ॐ भागीर्थ्ये च विद्महे विश्नुपत्न्ये च धीमहि ! तन्नो गंगा प्रचोदयात

गंगा की पूजा करते समय इस गंगा गायत्री मंत्र का जाप करें, इस दिन गंगा में स्नान करने से दस प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं.गंगा की पूजा करते समय दस प्रकार के नैवेद्य का उपयोग करें.

Ganga Dussehra date

इस वर्ष गंगा दशहरा ( Ganga Dussehra 2018 )24 मई 2018 को मनाया जायेगा. गंगा दशहरा में दान का भी बहुत माहात्म्य हैं.इस दिन जो भी चीजे दान में दी जाये उनकी संख्या दस होनी चाहिए . वैसे तो संभव इस दिन गंगा में ही स्नान करना चाहिए पर अगर संभव ने हो पाए , तो पास में ही किसी नदी या जलाशय में माँ गंगा का ध्यान करते हुए पूजा करनी चाहिए .इस दिन स्नान पूजा और दान से मानव के सारे दैहिक दैविक और भौतिक ताप नष्ट हो जाते हैं.

माँ गंगा के धरती पर अवतरण का फलदायी दिन गंगा दशहरा ( ( Ganga Dussehra date ) इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व हैं. भोले बाबा की अनुकम्पा और भगीरथ की कठिन तपस्या से गंगा का धरा पर अवतरण संभव हुआ , इस दिन शिव की पूजा भी विशेष फलदायी होती हैं, और भोले बाबा भक्तो की मनोकामनाओ को पूरा करते हैं. माँ गंगा के पावन पर्व को श्रद्धा से मनाये और गंगा को स्वच्छ रखने में सहयोग दे.

 

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