धर्म और आध्यात्म का केंद्र हैं महाबोध गया मंदिर

Mahabodhi Temple History | Mahabodhi Temple Architecture | when was the Mahabodhi Temple built

महाबोधि विहार ,( Mahabodhi Temple) या महाबोधि के नाम से विख्यात प्रसिद्ध बौद्ध मंदिर हैं, जो बोधगया में स्थित हैं, यही वह स्थान हैं जहा महात्मा बुद्ध को ज्ञान का साक्षत्कार हुआ . विश्व धरोहर के रूप में इस महाबोधि विहार की मान्यता बहुत अधिक हैं, यहाँ महात्मा बुद्ध की विशाल मूर्ति स्थित हैं, जिसमे वह पदमासन की मुद्रा में बैठे हैं.महाबोधि विहार में स्थित विहार के चारो और पत्थर से बनी रेलिंग यहाँ प्राप्त सबसे प्राचीन अवशेष  हैं.

यहाँ महात्मा बुद्ध की लाल बलुए से बनी पत्थर की मूर्ति हैं , जो 7 फ़ीट ऊंची हैं इस मूर्ति के चारो ओर लगी रंगीन पताकाएं मूर्ति को विशेष आकर्षण प्रदान करती हैं.बिहार में स्थित बोधगया तीर्थ का माहात्म्य न केवल भारत बल्कि विदेशो में भी इसकी मान्यता बहुत हैं ,विदेशो से हजारो सैलानी यहाँ महाबोधि मंदिर में भ्रमण के लिए आते हैं.

Mahabodhi Temple History

कपिलवस्तु के राजुमार सिद्धार्थ ने देखा की संसार,( Mahabodhi Temple History)  दुखो से ग्रसित हैं, इन्ही दुखो ने उन्हें अंदर से विरक्त कर दिया और वे सत्य की खोज और दुखो से निवारण के लिए घर को त्यागकर निकल पड़े . फल्गु नदी के तट पर पहुंचे वहाँ वे एक पीपल के नीचे ध्यानावस्था में लीन हो गए.

उसी पीपल के पेड़ के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ , इसी वृक्ष को बोधि वृक्ष का नाम दिया, वर्तमान में बोधि वृक्ष उस बोधि वृक्ष की पांचवी पीढ़ी हैं.महात्मा बुद्ध को वैसाख पूर्णिमा के दिन बोधिवृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ , वैसाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता हैं .महात्मा बुद्ध की मृत्यु के पश्च्यात सम्राट अशोक ने ही यहाँ महाबोधि मंदिर की स्थापना की.

Mahabodhi Temple Architecture

महाबोधि मंदिर बुद्ध के(Mahabodhi Temple Architecture) ज्ञान प्राप्ति का स्थान हैं, वही महाबोधि मंदिर अपनी शिल्पकला और वास्तुकला के लिए भी उतना ही प्रसिद्ध हैं,महाबोधि मंदिर का निर्माण ईटो से किया गया , ईटो से बना महाबोधि मंदिर वास्तुकला का बेहतरीन और उत्कृष्ट उदहारण हैं. महाबोधि मंदिर के पीछे महात्मा बुद्ध की लाल बलुए से बनी हुयी मूर्ति हैं, जो 7 फ़ीट ऊंची हैं.

मूर्ति के चारो और लगी रंगीन पताकाये मूर्ति को उत्कृष्टता और विशेष आकर्षण प्रदान करती हैं. मंदिर में प्रात: काल की बेला में गूँजते घंटे की ध्वनि मन को एक अलौकिक शांति और शक्ति प्रदान करती हैं.इसके अलावा यहाँ मंदिर के चारो और लगी हुयी बलुवा पत्थर और ग्रेनाइट से बनी रेलिंग लगी हुयी हैं.इन रेलिंग को उत्कृष्टता प्रदान करने के लिए इन पर माँ लक्ष्मी , भगवान सूर्य , कमल के फूल , हाथी और गरुड़ की तस्वीर चित्रित की गयी हैं.

when was the Mahabodhi Temple built

महाबोधि मंदिर(when was the Mahabodhi Temple built ) के निर्माण का समय आज से तीसरी शताब्दी पूर्व हुआ था , वर्तमान में जो मंदिर स्थित हैं ,उसका निर्माण पांचवी और छठी शताब्दी में हुआ.महाबोधि मंदिर ईटो से बना हुआ महात्मा बुद्ध के सबसे पहले बौद्ध मंदिरो में से एक हैं.जो गुप्त साम्राज्य से अब तक मजबूती के साथ खड़ा हैं.

Mahabodhi Temple

Mahabodhi Temple Facts

महाबोधि मंदिर (Mahabodhi Temple Facts) भारत का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण मंदिर हैं.महाबोधि मंदिर न केवल भारतीयों के लिए बल्कि विदेशियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र हैं. महाबोधि मंदिर से जुडी कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं . जो इस प्रकार हैं.

  • पीपल का वृक्ष जिसे महाबोधि वृक्ष कहा जाता हैं.उस के नीचे बैठकर महात्मा बुद्ध ने तीन तीन रात बैठकर गहन ध्यान और चिंतन किया , ज्ञान प्राप्ति के बाद सिद्धार्थ महात्मा बुद्ध बन गए.

  • 260 ईसा पूर्व सम्राट अशोक ने महाबोधि मंदिर का निर्माण कराया जो ईटो से बना हुआ प्रारंभिक बौद्ध मंदिरो में से एक हैं. प्राचीन काल में ईटो से बनी हुयी यह संरचना अपने आप में अद्भुत और अनूठी हैं.इसकी वास्तुकला का कोई जोड़ नहीं 
  • महाबोधि मंदिर का परिसर यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर के रूप में सरंक्षित हैं. सन 2002 से यूनेस्को ने महाबोधि मंदिर को अपने संरक्षण में ले लिया
  •  महात्मा बुद्ध की लाल बलुए से निर्मित मूर्ति , और महाबोधि वृक्ष यहाँ आकर्षण के प्रमुख केंद्र हैं.

Mahabodhi Tree

महाबोधि वृक्ष (Mahabodhi Tree) ही वह वृक्ष हैं जिसके नीचे बैठकर महात्मा बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति हुयी थी. वर्तमान में जो बोधि वृक्ष हैं वह उस बोधि वृक्ष की पांचवी पीढ़ी हैं.जिसके नीचे बैठकर महात्मा बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था.यह बोधि वृक्ष लगभग 2650 साल पुराना माना जाता हैं . महाबोधि वृक्ष का संरक्षण देहरादून के वन अनुसन्धान के वैज्ञानिक करते हैं, महाबोधि वृक्ष की नियमित जांच और उसके स्वास्थ्य का संरक्षण के लिए इसमें समय समय पर रासायनिक दवा का छिरकाव किया जाता हैं.

महाबोध गया मंदिर अपने धार्मिक और आध्यात्मिक दृषिकोण से न केवल बौद्धों बल्कि सभी धर्मावलम्बियों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं, महाबोधि मंदिर का निर्माण का श्रेय सम्राट अशोक को जाता हैं, बोधगया मंदिर के कारण ही बोधगया की धार्मिक और आध्यात्मिक महत्ता आज पूरे विश्व में व्याप्त हैं.

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