आस्था और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक हैं देवी मोकाम्बिका का मंदिर

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दक्षिण के प्रमुख तीर्थस्थानों में से एक देवी मुकाम्बिका का मंदिर  (Mookambika temple history) मैंगलोर से 147 किलोमीटर दूर स्थित हैं.कोल्लूर में स्थित इस मंदिर का निर्माण आदि शंकराचार्य ने कराया था.देवी मुकाम्बिका शक्ति स्वरुप हैं. कोदाचाद्रि चोटी की तलहटी में स्थित मोकाम्बिका मंदिर में माँ की पंचमिश्रित धातु की बनी हुयी छवि हैं.जिसकी स्थापना स्वयं आदिगुरु शंकराचार्य ने की थी.

मोकाम्बिका माँ के साथ यहाँ चन्द्रमौलीश्वर देव .पंचमुखी गणेश, प्राणलिंगेश्वरा प्रमुख देवो की यहाँ पूजा की जाती हैं. नवरात्रि के उत्सव के दौरान यहाँ भक्तो का जमावड़ा होता हैं, कृष्ण जयंती और जन्माष्टमी (Janmasthmi) का त्यौहार यहाँ बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं.यहाँ नन्हे छात्रों को अक्षर ज्ञान देने  को उत्सव के रूप में मनाया जाता हैं.अक्षर ज्ञान देने की परंपरा का यह उत्सव नवरात्रि ( Navratri ) के अंतिम दिन मनाया जाता हैं.

मोकाम्बिका मंदिर की कथा : Mookambika Temple history

Mookambika temple

पौराणिक कथाओ में जो कहानी वर्णित हैं.उसके अनुसार मोकाम्बिका मंदिर (Mokambika temple) में, कौमुसरा नामक राक्षस रहता था.उसने आपने आतंक से देवताओ को भी भयभीत किया था.देवता उससे दूरी बनाकर रखते थे.लेकिन जैसे ही देवताओ को पता चला कि इस राक्षस कि मृत्यु होने वाले है.उनमे प्रसंन्नता छा गयी और अपनी मृत्यु के भय से राक्षस ने शिव की आराधना कर दी.

जैसे ही शिव ने उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर उससे वर मांगने को कहा माता आदिशक्ति की कृपा से इसके बोलने की शक्ति चली गयी.इसके बाद इस राक्षस का नाम कौमुसरा से मूकासुर राक्षस पड़ा , आदि शक्ति ने देवो की शक्ति जुटाई और इस राक्षस का अंत कर दिया , इस कारण देव का नाम मुकाम्बिका पड़ा .

Dress Code in Mokambika Temple

Dress Code in Mokambika Mandir

मोकाम्बिका मंदिर दक्षिण के पवित्र तीर्थस्थानों में से एक हैं.यहाँ देवी की पूजा महासरस्वती, महालक्ष्मी गौरी के रूप में की जाती हैं.यहाँ मंदिर की विशेषता पवित्र और ज्योतिर्मय लिंग  (Jyotirling)  की हैं,इसी के साथ यहाँ माता की पांच धातुओं से निर्मित मूर्ति हैं जिसकी स्थापना शंकराचार्य जी ने की हैं.इस मंदिर की वास्तुकला बहुत ही अनुपम और अतुलनीय हैं .

ऐसी वास्तुकला को आप इस मंदिर का आश्चर्य भी कह सकते हैं. मंदिर में आपको आध्यात्मिक और दैवीय शक्ति का आभास होता हैं.जो मंदिर में स्थित देवी की उपस्थिति का चमत्कारिक परिणाम हैं.दक्षिण के अन्य मंदिरो की तरह मुकाम्बिका मंदिर में भी आपके पहनावे को लेकर काफी सख्त नियम हैं.(Mookambika temple dress code) मंदिर में पुरुष भक्त केवल धोती और शाल में ही प्रवेश कर सकते हैं.महिला भक्त केवल साड़ी या सलवार सूट में ही मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं.जीन्स या पाश्चत्य परिधानों में आप मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकते हैं.

Kollur Mookambika temple timings

Kollur Mookambika temple timings

देवी की महिमा का वर्णन कही वेद पुराणों , देवी भगवत ,में वर्णित हैं पर स्कन्द पुराण में देव मुकाम्बिका की महिमा का वर्णन करते हुए देवी मुकाम्बिका की पूजा के लिए कोई भी दिन या समय सर्वोत्तम हैं. पर शुक्रवार का दिन को देवी की पूजा के लिए बहुत ही पावन माना गया हैं | (kollur Mookambika temple timings) देवी मुक़ाबिका के मंदिर में दर्शन करने का समय सुबह 5 :30 से दिन में 1 बजे तक और फिर संध्या काल में 3 बजे से लेकर 9 बजे तक के समय को आम दर्शनार्थियों के लिए रखा गया हैं.

समय            पूजा विधि का वर्णन
5.00 A.M      मंदिर के कपाट खुलने का समय
 6.00 A.M     प्रात: काल की पूजा शुरू
 8.00 A.M     मगलाआरती
 11.30 A.M    दिन की पूजा अर्चना की शुरुवात
 12.00 P.M    महा नैवेद्य
12.15 P.M     बलि
 1.30 P.M      मंदिर के कपाट बंद होने का समय
 6.00 P.M      संध्या काल में प्रसाद पूजा
 7.30 P.M      मगलाआरती
 8.00 P.M      बलि मंगला आरती
 8.30 P.M      बलि उत्सव
 9.00 P.M      मंगला आरती

Devi Mokambika jwellery

Devi Mokambika jwellery

देवी मोकाम्बिका देवी महालक्ष्मी के नाम से भी प्रसिद्ध हैं. यहाँ देवी के मंदिर में स्थित आने वाले हर भक्त अपने प्रार्थना लिए देवी के दरबार में आते हैं.और जिन भक्तो की प्रार्थना देवी मोकाम्बिका द्वारा पूरी कर ली जाती हैं, वे देवी को गहनों से अलंकृत करते हैं.

देवी का स्वरुप अत्यंत भव्य हैं. देवी को कई आभूषण वैसे उनके भक्तो द्वारा अर्पित किये गए हैं.पर इनमे सबसे कीमती रत्न पन्ना हैं, पन्ना एक ऐसा रत्न हैं ज्ञान का प्रतीक हैं.इस मंदिर की एक और विशेषता यहाँ पर स्थित त्रिदेव की शक्तिया और लक्ष्मी ,पार्वती और सरस्वती के रूप में देवी की शक्तियाँ मौजूद हैं.त्रिदेव और देवियो की शक्तियाँ इस मंदिर को आध्यात्मिक और अलौकिक वातावरण प्रदान करती है.जिससे मंदिर में आने वाला हर भक्त इन दैवीय आभा से अभिभूत हो जाता हैं.

Natural Beauty of Kollur

कोल्लूर में देवी मोकाम्बिका के मंदिर के नजदीक अन्य भी बहुत से ऐसे स्थान हैं, जो दर्शनीय हैं, रस्‍वती मंटप, वीरभद्र स्‍वामी मंदिर, बालमुरी गणपति मंदिर, सुब्रमण्‍य स्‍वामी मंदिर, चौदेश्‍वरी मंदिर  हैं.

यहाँ पर प्राकृतिक सौंदर्य का भी खूब अनूठा संगम देखने को मिलता हैं.जिसका एक उदाहरण कोल्लूर से 4 किलोमीटर दूर अरासिंगुंडी नामक एक सुन्दर जल प्रपात हैं.इसके अलावा यहाँ बहने वाली नदी सोपर्णिका नदी हैं, इस नदी को बहुत पवित्र माना जाता हैं, इस नदी में स्नान का बहुत महत्व हैं.

कैसे पहुंचे : How To Reach

कर्णाटक में स्थित दक्षिण भारत के पवित्र तीर्थस्थान मुकाम्बिका मंदिर के दर्शनार्थ के लिए नजदीकी एयरपोर्ट मेंगलोर एयरपोर्ट हैं.और अगर रेलवे से यात्रा करना चाहे तो सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन नजदीकी कुंदपुरा रेलवे स्‍टेशन है। यहां से कोल्‍लूर के लिए बस-टैक्‍सी की सुविधा उपलब्‍ध है।

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