मुरुद्वेश्वर स्थित शिव के आत्मलिंग का बहुत बड़ा महत्व

दक्षिण भारत मंदिरो और और मंदिरो से सम्बंधित वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध हैं जितनी सुन्दर और भव्य कला वह स्थित मंदिरो की हैं वैसी शिल्पकला विश्व में कही देखने को मिले. इन्ही भव्य मंदिरो की शृंख्ला में एक मंदिर हैं मुरुदेश्वर मंदिर (Murudeshwar Temple Story),यह मंदिर स्थित हैं कर्णाटक राज्य के उत्तर कन्नड़ जिले में स्थित एक क़स्बा जिसका नाम हैं मुरुदेश्वर.वही  स्थित हैं.

मुरुदेश्वर धाम ,मुरुदेश्वर शिव का एक नाम हैं, यहाँ पर स्थित शिव की मूर्ति विश्व की दूसरी सबसे बड़ी मूर्ति हैं.अरब सागर ने तीन सिरों से मंदिर को घेरा हुआ हैं हैं मंदिर में स्थित गोपुरम 20 मंजिला हैं.यहाँ स्थित राजा गोपुरम की ऊंचाई 237 .5 फ़ीट ऊंची हैं. यहाँ पर एक लिफ्ट भी हैं जो भक्तो को गोपुरम में स्थित ऊंचाई तक ले जाती हैं.

 

Murudeshwar Temple Story

मुरुदेश्वर मंदिर की कथा (Murudeshwar Temple Story) शिव पुराण में मिलती हैं, जिसमे वर्णिंत कथा में यहाँ लिखा हैं की जब रावण ने शिव को प्रसन्न करने के बाद अमरता पाने हेतु उनका आत्मलिंग अपने साथ ले जा रहा था तो , अपनी यात्रा के दौरान रावण ने वह आत्मलिंग यहाँ रखा तो वह आत्मलिंग यहाँ स्थापित हो गया ,रावण यह देखकर बहुत क्रोधित हो गया और इसे नष्ट करने का प्रयास किया. जब वह इसे नष्ट करने का प्रयास कर रहा था तभी वह वस्त्र जिससे आत्मलिंग ढका था वह मुरुदेश्वर में जा गिरा.

यहाँ स्थित गोपुरम को एक स्थानीय निवासी ने बनाया था, और इस गोपुरम के दोनों और हाथी की ऊंची मूर्तियाँ स्थित हैं. और यहाँ स्थित शिव की मूर्ति विश्व की दूसरी सबसे बड़ी मूर्ति हैं. जिसकी ऊंचाई 123 फ़ीट हैं. यह मूर्ति को दूर से ही देखा जा सकता हैं. इस मूर्ति को बनवाने में लगभग 5 करोड़ लगे ,मूर्ति का निर्माण कार्य ऐसे कराया हैं की सूर्य की किरणों से यह लगातार चमकती रहे .

मुरुदेश्वर मंदिर कंदुका पहाड़ी पर स्थित हैं, मंदिर में स्थित शिव की मूर्ति और गोपुरम मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता हैं.और शिव की बनी हुयी मूर्ति की एक विशेषता ये भी हैं की इसके हाथ मूल रूप से स्वर्ण से निर्मित थे , पर अरब सागर से उठने वाली लहरों ने हाथो के मूल रंग को धूमिल कर दिया और बारिश ने इसके रंग को हल्का कर दिया .

 

Murudeshwar Temple Timings

मुरुदेश्वर मंदिर अपनी सुंदरता और अपने विशाल गोपुरम के लिए विख्यात हैं.यहाँ पर स्थित हाथी जो गोपुरम के साथ में बने हैं , कंक्रीट के बने हुए हैं अपनी जीवंतता के लिए पर्यटन का केंद्र हैं , देश और विदेशो से अनेक भक्त और पर्यटक इसे देखने और भ्रमण के लिए आते हैं.मंदिर में दर्शन के लिए समय इस प्रकार हैं.(Murudeshwar Temple Timings)

प्रातकाल दर्शन का समय –    6 AM to 1 PM
संध्याकाल दर्शन का समय –   3 PM to 8:30 PM
प्रातकाल पूजा का समय –        6:30 AM to 7:30 AM
महा पूजा का समय –                12:15 PM to 1 PM
रात्रि पूजा –                          7:15 PM to 8:15 PM

 

FESTIVALS CELEBRATED AT THE TEMPLE

मुरुदेश्वर मंदिर में मनाये जाने वाले त्यौहार की शृंख्ला इस प्रकार हैं .(Festivals Celebrated At The Temple )

महाशिवरात्रि -शिवरात्रि का त्यौहार मुरुदेश्वर में बहुत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाने वाला त्यौहार हैं.शिवरात्रि का त्यौहार फरवरी या मार्च में मनाया जाता हैं. इस त्यौहार की महिमा कहे या महत्त्ता पार्वती और भगवान शिव के कारण ही हैं , मान्यता हैं महाशिवरात्रि को शिव और पार्वती का विवाह हुआ था. कुछ विद्वान ये भी मानते हैं , समुद्र मंथन के दौरान जो कालकूट विष निकला था , वह महाशिवरात्रि के दिन ही पिया था. आज के दिन भोले के भक्त मंदिर में आते हैं , और भगवान शिव की पूजा अर्चना करके उनका आर्शीवाद प्राप्त करते हैं.

कार्तिक पूर्णिमा :कार्तिक पूर्णिमा के दिन की महिमा बहुत फलदायी हैं.इस दिन को देव दिवाली के रूप में भी मानते हैं, इस दिन का भी भगवान शिव के साथ अनूठा सम्बन्ध हैं, त्रिपुर नाम के राक्षस ने ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया , कि न वो देवो के हाथो मरे न मनुष्यो के हाथो .वरदान प्राप्त करके त्रिपुर ने तीनो लोको में आतंक मचा दिया था. कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान शिव ने त्रिपुर का वध किया . कार्तिक पूर्णिमा के दिन को भी मुरुदेश्वर मंदिर में धूमधाम से मनाया जाता हैं.

NEARBY TEMPLES

मुरुदेश्वर मंदिर के आस पास कई दर्शनीय स्थान हैं.(Nearby Temples) जो बहुत ही सुन्दर और रमणीक हैं. आइये जानते हैं इन मंदिरो और दर्शनीय स्थलों के बारे में .

उडुपी कृष्ण का मंदिर


उडुपी का कृष्ण मंदिर दक्षिण भारत के प्रमुख तीर्थस्थानों में से एक हैं , इस कृष्ण मंदिर की एक विशेषता यह हैं की यहाँ कृष्ण के दर्शनार्थ हेतु आपको मंदिर में प्रवेश नहीं करना पड़ता , अपितु एक छोटी सी खिड़की में बने छिद्रो से आप भगवान कृष्ण का दर्शन पा सकते हैं. उडुपी कृष्ण मंदिर प्राचीन मंदिरो में से एक मंदिर हैं. कृष्ण का श्रृंगार यहाँ देखने लायक हैं.

भटकल


भटकल मुरुदेश्वर से 30 किलोमीटर दूर स्थित बहुत सुन्दर स्थान हैं जो अपने खूबसूरत समुद्री तटों और अपने गौरवमयी इतिहास के लिए प्रसिद्ध हैं. केतपइया नारायण यहाँ का प्रसिद्ध मंदिर हैं. इसके अलावा यहाँ कई मंदिर मस्जिद भी हैं.भटकल में पर्यटक समुद्र तटों की ख़ूबसूरती के लिए आते हैं, यहाँ सूर्यास्त और सूर्योदय का दृश्य बहुत ही मनोरम हैं.

मिरजन किला


मिरजन किला प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थस्थान गोकर्ण से 11 किलोमीटर दूर स्थित हैं.ये किला 16 शताब्दी में बनाया गया .ये किला लेटराइट पत्थरो से निर्मित हैं.मान्यता हैं कि गेरसप्पा की रानी चेन्नैभेरदेवी ने 16 वी सदी में इस किले का निर्माण कराया था. वर्तमान में इस किले की हालत बहुत ही जर्जर हैं इसकी संरक्षण की जिम्मेदारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पास हैं.

गोकर्ण


गोकर्ण दक्षिण भारत में स्थित मेंगलोर के पास एक ग्राम हैं.मान्यता हैं यहाँ शिव का जन्म गाय के माना जाता हैं. इसलिए इस स्थान का नाम गोकर्ण हैं.गोकर्ण धार्मिक आस्थाओ का स्थान हैं , यहाँ कई हिन्दू मंदिर स्थित हैं.इसके अलावा गोकर्ण प्राकृतिक आकर्षणों से घिरा हुआ स्थान हैं.यहाँ समुद्र के बीच बहुत ही सुन्दर और मनोरम हैं. ॐ बीच , पैराडाइज बीच ,यहाँ समुद्र के प्रमुख बीच हैं.

How To Reach

मुरुद्वेश्वरा पहुंचने के लिए तीन सेवाएं उपलब्ध हैं. (How to Reach)

हवाई यात्रा – हवाई मार्र्ग से अगर आप मुरुद्वेश्वर जाना चाहते हैं तो नजदीकी एयरपोर्ट मंगलोर एयरपोर्ट हैं. जो मंगलोर से 13 किलोमीटर दूर बाजपे नामक स्थान में स्थित हैं.यहाँ से मुरुदेश्वर की दूरी 137 किलोमीटर हैं .

रेल मार्ग के द्वारा -देश के अन्य बड़े शहर से मुरुदेश्वर रेल मार्ग के द्वारा जुड़ा हुआ हैं.तो आप ट्रैन के द्वारा भी मुरुदेश्वर जा सकते हैं.

सड़क मार्ग के द्वारा -मुरुदेश्वर के लिए बस सेवा भी उपलब्ध हैं देश के प्रमुख बड़े शहरो से मुरुद्वेश्वर के लिए बस सेवा उपलब्ध हैं.

 

SIGNIFICANCE OF THE TEMPLE

मुरुदेश्वर मंदिर में स्थित शिव के आत्मलिंग का बहुत बड़ा माहात्म्य हैं.(Significance of the Temple)सभी देव इस आत्मलिंग की प्रार्थना करते हैं.मुरुद्वेश्वर मंदिर कर्णाटक में शिव मंदिरो में प्रसिद्ध मंदिर हैं.अन्य मंदिरो में नंजूनडेशवर मंदिर, धर्मस्थल मंदिर ,धारेश्वर मंदिर ,और गोकर्ण का महाबलेश्वर मंदिर , यहाँ स्थित शिव की मूर्ति विश्व की दूसरी सबसे बड़ी मूर्ति हैं , जिसकी ऊंचाई 123 फ़ीट हैं,

विश्व की सबसे ऊंची शिव की मूर्ति नेपाल में स्थित हैं, जो कैलाशनाथ महादेव के नाम से स्थित हैं.मूर्ति इस प्रकार से निर्मित हैं कि सूर्य की प्रथम किरणे भगवान् शिव की मूर्ति पर पड़ती हैं.दूसरी विशेषता मुरुदेश्वर मंदिर की यहाँ स्थित गोपुरम की हैं , जो 237 .5 फ़ीट ऊंची हैं.जो विश्व में दूसरा ऊंचा गोपुरम हैं .सबसे ऊंचा गोपुरम रामेश्वरम मंदिर का गोपुरम हैं

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