शक्तिपीठो में एक हैं माँ चामुंडेश्वरी का पावन धाम

भारतीय संस्कृति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं यहाँ की सभ्यता और संस्कृति , और संस्कति और सभ्यता को एक जीवंत रूप प्रदान करते हमारे मंदिर जो हमारी समृद्ध और वैभवशाली संस्कृति का प्रतीक हैं , इन्ही मंदिरो में आज हम बात कर रहे हैं कर्णाटक राज्य में स्थित मैसूर से 13 किलोमीटर दूर स्थित चामुंडा पहाड़ी की ऊंचाई पर स्थित चामुंडेश्वरी देवी  के मंदिर की (Mysore Chamundeshwari Temple)

12 वी सदी में निर्मित यह मंदिर को शक्ति पीठ माना जाता हैं . चामुंडेश्वरी देवी (Chamundeshwari) के मंदिर की गिनती 18 शक्तिपीठो में की जाती हैं. मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए जाना जाता हैं . द्रविड़ वास्तुकला शैली में निर्मित यह मंदिर बहुत ही भव्य और अनूठा हैं.

Mysore Chamundeshwari Temple Story

माता चामुंडेश्वरी देवी माता (Chamundeshwari Temple History) का इतिहास 12 सदी का हैं , चामुंडेश्वरी देवी माता का मंदिर माता की महिसासुर पर विजय का प्रतीक हैं.चामुंडा मंदिर की शिल्पकला बहुत ही अनूठी और अद्भुत हैं.

द्रविण शैली में बना यह मंदिर सात मंजिल का हैं इसकी ऊंचाई 40 मीटर हैं. चामुंडेश्वरी देवी मंदिर के गर्भगृह में स्थित माँ की प्रतिमा शुद्ध स्वर्ण की बनी हुयी हैं.यहाँ स्थित महाबलेश्वर का मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध हैं.

इस मंदिर की महत्त्ता का पता इस बात से ज्ञात होता हैं कि महाबलेश्वर के मंदिर कि प्राचीनता लगभग 1000 वर्ष पुरानी हैं. मंदिर की भव्यता भक्तो के आकर्षण का केंद्र हैं.

मदिर जाने वाले मार्ग में पड़ने वाले चौक पर महिसासुर की विशाल प्रतिमा बनी हुयी हैं . महिषासुर की यह प्रतिमा भी विशेष आकर्षण का केंद्र हैं. महिषासुर की यह मूर्ति लगभग 16 फ़ीट ऊंची हैं, मंदिर मार्ग पर थोड़ा आगे बढ़ने पर शिव वाहन नंदी की काले ग्रेनाइट से निर्मित प्रतिमा रखी हैं. जो भव्य और विशाल बनी हैं .

 

Chamundi Hills History

चामुंडी हिल्स (Chamundi Hills History)
जैसा की नाम से ही स्पष्ट हैं, देवी चामुंडेश्वरी से सम्बंधित हैं, देवी चामुंडेश्वरी का मंदिर चामुंडी पहाड़ी की ऊंचाई पर स्थित हैं. चामुंडा हिल्स की पहाड़ियों से अत्यंत मनोरम दृश्य दिखाई देते हैं. मैसूर पैलेस का भव्य नजारा चामुंडा पहाड़ियों से आप देख सकते हैं.चामुंडा पहाड़ी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व इस बात से ही सिद्ध हैं, की यहाँ माता चामुंडेश्वरी का पावन शक्तिपीठ स्थित हैं , और जो 18 पावन शक्तिपीठो में महत्वपूर्ण स्थान रखता हो.

Places to visit in Mysore

मैसूर कर्नाटक प्रान्त का एक ऐतिहासिक शहर हैं. इस शहर में विभिन्न साम्राज्यों का आधिपत्य रहा , जिसमे प्रसिद्ध हिन्दू साम्राज्य विजयनगर भी मैसूर में ही पल्ल्वित हुआ . आज हम चलते हैं, मैसूर के आस पास के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थलों के दर्शन के लिए

मैसूर महल

मैसूर महल( Mysore Palace) की गणना भारत के प्रसिद्ध और भव्य महलो में की जाती हैं. मैसूर के महल का वास्तु ब्रिटिश डिजाइनर हेनरी इर्विन ने किया था. महल में सुशोभित स्वर्ण सिंहासन महल की आकर्षक और दर्शनीय वस्तुओ में से एक हैं. इस सिहांसन में जड़ित बहुमूल्य रत्न इसकी शोभा को और बड़ा देते हैं, इस स्वर्णिम सिहांसन के अलावा यहाँ कांच से बनी छत और महल की दीवारों पर लगी तस्वीरें शोभनीय हैं.इस महल के सरंक्षण की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग की हैं.

वृन्दावन उद्यान


मैसूर पर्यटन की दृष्टि से भी बहुत सुन्दर और आकर्षक स्थान हैं, इसी क्रम में मैसूर में कृष्णासागर बांध से जुड़ा हुआ वृन्दावन उद्यान हैं (Brindavan Gardens Mysore)जो मैसूर के प्रमुख आकर्षणों में से एक हैं .इस उद्यान का निर्माण कार्य 1932 में संपन्न हुआ . इस आकर्षक और विशाल उद्यान के वास्तुकार जी.एच.कृम्बिगलजी थे. इस उद्यान में फल उद्यान , संगीतमय फुव्वारा , और झील जिसमे लोग नाव में बैठकर जल विहार का भी आनंद लेते हैं आकर्षण का केंद्र हैं.

 

कृष्णराज सागर बांध


कृष्ण राज सागर बांध मैसूर(Krishnaraja Sagar Dam Mysore) से 12 किलोमीटर दूर स्थित हैं . 1932 में बना यह बाँध आजादी से पहले की इंजीनियरिंग कला का बेजोड़ नमूना हैं.8600 फ़ीट की ऊंचाई वाला यह बांध एक बेहतरीन अभियांत्रिकी का उदाहरण हैं .

 

मैसूर चिड़ियाघर


मैसूर स्थित चिड़ियाघर(Mysore Chidiya Ghar) भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं. इस चिड़ियाघर में आकर्षण का प्रमुख केंद्र यहाँ के शेर हैं , इसके अलावा यहाँ सफ़ेद मोर भी पाए जाते हैं.इसके अलावा यहाँ चिड़ियाघर में एक झील भी आकर्षण का केंद्र हैं. जहा प्रवासी पक्षी बड़ी संख्या में आते हैं. इसके अतिरक्त यहाँ एक जैविक उद्यान भी हैं.

 

जगन मोहन महल


जगन मोहन महल(Jaganmohan Palace Mysore) एक तीन मंजिला ईमारत हैं .1861 में इस महल का निर्माण हुआ . वर्तमान में यह एक आर्ट गैलरी के रूप में विख्यात हैं, जहा बहुत सारी तस्वीरें दुर्लभ वाद्यंत्र , को सहेजकर रखा गया हैं , जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं. इस महल का निर्माण महाराज कृष्णराज ने कराया था. यहाँ रखी गयी चित्रकारी मैसूर और तंजोर की शैली को प्रदर्शित करती हैं. महल आम जनता के लिए सवेरे 8 :30 बजे खुल जाता हैं. और शाम को 5 :30 बजे बंद हो जाता हैं.

श्रवणबेलगोला


श्रवणबेलगोला (Shravanabelagola Mysore) एक प्रसिद्ध जैन तीर्थ हैं. जो बैंगलोर से 158 किलोमीटर दूर स्थित हैं, यहाँ जैन धर्म के तीर्थंकर ऋषभ देव के पुत्र बाहुबली को मोक्ष की प्राप्ति हुयी थी. जैन अनुयायियों के लिए यह तीर्थस्थान हैं , बारह वर्ष में एक बार महामस्तकाभिषेक होता हैं ,महामस्तकाभिषेक के अवसर पर यहाँ जैन श्रद्धालु आते हैं, बाहुबली यहाँ मोक्ष प्राप्त करने वाले प्रथम तीर्थंकर थे.

Nandi Hills information

नंदी हिल्स(Nandi Hills ) एक आकर्षक पर्यटन स्थल हैं .आनंदगिरि के नाम से विख्यात नंदी हिल्स टीपू सुल्तान की ग्रीष्म कालीन राजधानी हुआ करता था , यहाँ टीपू सुल्तान द्वारा निर्मित एक दुर्ग भी हैं जिसे नंदी दुर्ग भी कहा जाता हैं . इसके अलावा यहाँ टीपू सुल्तान का किला , नंदी मंदिर , गाँधी हाउस आदि देखने लायक स्थान हैं.

 

माँ चामुंडेश्वरी(Chamundeshwari) देवी के पावन शक्तिपीठ से सुशोभित मैसूर , देवी चामुंडेश्वरी के अलावा यहां मनाये जाने वाले दशहरा पर्व के लिए विख्यात हैं, वैसे तो दशहरा पूरे भारत वर्ष में धूमधाम से बनाया जाता हैं पर मैसूर के दशहरा की बात ही विशेष हैं, माँ चामुंडेश्वरी की महिषासुर के ऊपर विजय के प्रतीक पर्व के रूप यहाँ दशहरा मनाया जाता हैं .मैसूर में दशहरा का त्यौहार पारम्परिक तरीके से मनाया जाने वाला उत्सव हैं , 10 दिनों तक मैसूर में दशहरा की धूम होती हैं. इस मौके पर यहाँ के निवासी इस त्यौहार को मनाने के लिए कई कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं.

 

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पर्यटन और अध्यात्म का केन्द्र हैं नंदी हिल्स

 

 

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