तैतीस करोड़ देवी देवताओ का प्रतीक हैं पाताल भुवनेश्वर की गुफा

देवभूमि उत्तराखंड को (Patal Bhuvaneshwar Uttrakhand) यही देवभूमि नहीं कहा जाता हैं.देवो की भूमि कही जाने वाली यह धरा विभिन तीर्थस्थानो , से सुशोभित हैं, बद्री विशाल हो या पवित्र ज्योतिर्लिंग केदार ,हर की भूमि हरिद्वार हो या पावन गंगोत्री ,जमनोत्री धाम यहाँ कण कण में देवो का वास हैं.

इस पावन अलौकिक धरा में आज हम आपको ले चलते हैं एक ऐसी जगह जहा धरा के अंदर स्थित गुफा में हैं पाताल भुवनेश्वर की गुफा (Patal Bhuvaneshwar Uttrakhand)जो धरा के अंदर 90 फ़ीट की गहराई में हैं, यहाँ पार्वती पति भोलेनाथ के साथ विराजमान हैं तैतीस करोड़ देवी देवता, आश्चर्य और रोमांच से भरी यह गुफा आपको आस्था के नजदीक ले जाएगी , और आपके दिल में आश्चर्य भी पैदा करेगी .महादेव ,पार्वती पति भोलेनाथ का मंदिर. एक ऐसी गुफा जो 160 फ़ीट लम्बी और 90 फ़ीट गहरी है. सुनकर आपके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहेगा पर यह सत्य हैं.माना जाता हैं , इसकी खोज के श्रेय आदि गुरु शंकराचार्य को जाता हैं.

Patal Bhuvaneshwar History

पाताल भुबनेश्वर शिव का निवास स्थान हैं , (Patal Bhuvaneshwar Story)यहाँ देव गण शिव की स्तुति करने आते हैं. किसी देवलोक के समान अद्धभूत,अलौकिक पाताल भुवनेश्वर की महिमा का जितना हम बखान करे उतना कम हैं.चारो धामों के माहात्म्य को समेटे इस गुफा में हमें हिन्दू धर्म के तैतीस करोड़ देवी देवताओ के दर्शन इस गुफा में एक साथ हो जाते हैं. यह किसी चमत्कार से कम नहीं नहीं हैं.

ऐसा माना जाता हैं इस गुफा में शिव ने गणेश का वह कटा सर रखा हैं जो हाथी वाले मस्तक से पहले था . किवदंती के अनुसार शिव ने क्रोध में गणेश जी का सर धड़ से अलग कर दिया, फिर माँ पार्वती के कहने पर उन्हें हाथी का मस्तक लगाया गया . जो मस्तक काटा गया वो पाताल भुवनेश्वर की गुफा में स्थित हैं.

गुफाओ में स्थित देवी देवताओ के अलावा यहाँ पर ब्रह्मकमल भी हैं, ऐसी मान्यता हैं यह ब्रह्मकमल यहाँ महादेव ने ही रखा हैं. इस ब्रह्मकमल से दिव्य पानी की बूद आदि गणपति के मुँह में लगातार गिरती हैं. गुफा के अन्य दर्शनीय स्थलों में यहाँ चार युगो के प्रतीक के रूप में स्थित चार शिला हैं . कलयुग के रूप में जो शिला हैं वह लगातार ऊपर की और उठ रही हैं, मान्यता हैं जिस दिन वह गुफा से टकरा जाएगी, उस दिन कलयुग का अंत हो जायेगा

 

Patal Bhuvaneshwar cave temple

पाताल भुवनेश्वर की गुफा (patal bhuvaneshwar gufa) को बहुत पावन गुफा माना जाता हैं.इस गुफा में वरुण, कुबेर ,यक्ष, यम आदि की प्रतिमाये स्थित हैं, इस गुफा का एक महत्व इस कारण से भी हैं , यहाँ कराई गयी पूजा का महात्म अश्वमेघ यज्ञ को कराने के फल के बराबर माना जाता हैं. आस्था और अध्यात्म का यह पावन क्षेत्र भूतल में इतनी बड़ी गुफा और देवी देवताओ के स्वरूपों से विराजित अपने आप में एक आश्चर्य हैं. चुने पत्थर से बनी यह गुफा धरा से 90 फ़ीट नीचे हैं.  पाताल भुवनेश्वर गुफा चुने पत्थर से निर्मित हैं, और गुफा(Patal Bhuvaneshwar cave temple) का प्रवेश द्वार बहुत ही संकरा हैं जिसमे आप मोटी चैन के सहारे पकड़ पकड़ कर अंदर जा सकते हैं, गुफा के अंदर का वातावरण बहुत ही शीतल और स्फूर्ति प्रदान करने वाला हैं.

जिसमे आप को आध्यात्मिक और अलौकिक शक्ति का एहसास होगा. गुफा के भीतर विभिन्न प्रकार की आकृतिया हैं, जिसमे शेषनाग की आकृतियों वाली सरंचना दीवारों पर उभरी हुयी है. यहाँ एक कुंड भी हैं जिसकी मान्यता हैं राजा परीक्षित के पुत्र जन्मेजय ने सारे नागो को जलाकर भस्म कर दिया , जिसमे तक्षक नाग बच निकला था , बाद में तक्षक नाग ने बदला लेते हुए राजा परीक्षित को मार गिराया था.इसी गुफा में काल भैरव की जीभ नजर आती हैं, मानो किसी काल के आने का संकेत दे रही हो. इसी गुफा में विश्वकर्मा द्वारा पांडवो के लिए निर्मित जलकुंड हैं, जो उन्होंने पांडवो के प्रवास के दौरान बनाया था. इसी से आगे बढ़ने पर दो द्वार नजर आते हैं. जिन्हे धर्म और मोक्ष द्वार भी कहा जाता हैं.

Patal Bhuvaneshwar how to reach

पाताल भुवनेश्वर उत्तराखण्ड में पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट में स्थित हैं.(Patal Bhuvaneshwar how to reach) गंगोलीहाट से 14 किलोमीटर दूर स्थित पाताल भुवनेशवर की पावन गुफा स्थित हैं. पाताल भुवनेश्वर जाने के लिए हवाई यात्रा, रेल यात्रा , और सड़क मार्ग से भी सुविधाएं उपलब्ध हैं.

हवाई मार्ग – यदि आप दिल्ली या किस अन्य बड़े शहर से जा रहे हैं,तो नजदीकी एयरपोर्ट पंतनगर एयरपोर्ट हैं जो पाताल भुवनेश्वर से 244 दूर स्थित हैं, यहाँ से पाताल भुवनेश्वर के लिए टैक्सी , या प्राइवेट कैब उपलब्ध हैं.

रेल मार्ग – यदि आप ट्रेन से यात्रा कर रहे हैं तो नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर हैं.टनकपुर रेलवे स्टेशन से पाताल भुवनेश्वर की दूरी 154 किलोमीटर हैं. टनकपुर रेलवे स्टेशन बड़े शहरो दिल्ली , लखनऊ से जुड़ा हुआ हैं , टनकपुर रेलवे से आप ,पाताल भुवनेश्वर , गंगोलीहाट , पिथौड़ागढ़ के लिए टैक्सी , या प्राइवेट कैब या बस से आसानी से जा सकते हैं.

सड़क मार्ग – पाताल भुवनेश्वर सड़क मार्ग के द्वारा उत्तराखण्ड के सभी प्रमुख शहरो से जुड़ा हुआ हैं. आनंद विहार अंतर्राजीय बस अड्डे से टनकपुर ,गंगोलीहाट ,पिथौरागढ़ के लिए बस सेवाएं उपलब्ध हैं, यहाँ से आप टैक्सी या प्राइवेट कैब से आसानी से पाताल भुवनेश्वर जा सकते हैं.

Patal Bhuvaneshwar distance from Delhi

दिल्ली से पाताल भुवनेश्वर की दूरी 459 किलोमीटर हैं. (Patal Bhuvaneshwar distance from Delhi)अगर आप खुद के वाहन से जा रहे हैं,तो यदि आप बिना विश्राम लिए लगातार यात्रा करते हैं, तो आपको 8 घंटे 16 मिनट का समय लगेगा, पर बेहतर होगा इतने भव्य और सुरम्य यात्रा को आप लगातार न करके बीच में विश्राम के साथ करे , जिससे आपकी यात्रा भी सुखद होगी और आप प्रकृति के मनोहर दृश्यों का अवलोकन करते हुए आगे बढ़ेंगे.

Patal Bhuvaneshwar Yatra

पाताल भुवनेश्वर की यात्रा (Patal Bhuvaneshwar Yatra) वैसे तो सरकार द्वारा आयोजित नहीं की जाती आप वर्ष में कभी भी पाताल भुवनेश्वर की यात्रा कर सकते हैं. पर इस बात का भी ध्यान दे पहाड़ की यात्रा तो वैसे भी सुकून और ताजगी से भरी पूरी होती हैं , पर कोशिश यही करियेगा की मानसून के दौरान यहाँ की यात्रा करने से बचे, क्युकी पहाड़ी इलाको में मानसून के दौरान सड़क मार्ग थोड़ा बाधित रहता है, जिसकी वजह से आपको समस्या का सामना करना पड़ सकता हैं. इसलिए मानसून के दौरान यात्रा न करे .

उत्तरांखंड के कुमाऊ मंडल में स्थित इस पवित्र गुफा का दर्शन करके आपको भी आनंद की प्राप्ति हुयी होगी. आस्था और अध्यात्म का प्रतीक ये गुफा अद्धभूत और आश्चर्य का प्रतीक हैं. प्रकृति के सुरम्य वातावरण के बीच स्थित ये गुफा व्यक्ति को अध्यात्म और आस्था के नजदीक ले जाती हैं.

 

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