उत्कृष्ट कला का बेहतरीन उदाहरण हैं वारंगल के ये मंदिर

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काकतीय वंश के शासको की प्राचीन राजधानी रहा वारंगल उत्तरी तेलंगाना का प्रमुख शहर हैं.वारंगल शब्द की हिंदी व्याख्या करे तो वारंगल शब्द ओरकुल शब्द का अपभ्रंश हैं,जिसका अर्थ हैं शिला ,और यह शिला ही जिस पर काकतीय दुर्ग व्यवस्थित था.11 वी सदी से 13 वी सदी तक यहाँ अनेक भव्य मंदिरो का निर्माण हुआ .(Warangal famous temples)जिनमे हज़ार स्तम्भों वाला मदिर,भद्रकाली मंदिर ,पद्माक्षी मंदिर,रामप्पा मंदिर शामिल हैं.आगे हम विस्तार से इन प्राचीन मंदिरो के बारे में वर्णन करेंगे .

हजार स्तम्भ वाला मंदिर- Thousand Pillar temple

thousand pillar temple

1163 ईसा पूर्व में हजार स्तम्भ वाले मंदिर (thousand pillar temple)  का निर्माण हुआ.इस मंदिर में भगवान् महादेव , भगवान् विष्णु , और सूर्य देव की मूर्तियाँ हैं.काकतीय वंश के राजा रुद्रदेव ने करवाया था. तुगलक वंश के आक्रमण के दौरान इस मंदिर का नुक्सान हुआ. 2004 में भारत सरकार ने इस मंदिर का पुनर्निर्माण कराया .इस मंदिर को त्रिकुटल्यम के नाम से भी जाना जाता हैं.इस मंदिर का आकार एक तारे के सामान का हैं मंदिर में शिव , विष्णु, और सूर्य देव की मूर्तियाँ हैं इसके अलावा छोटे छोटे शिवलिंग हैं.

हजार खम्बो वाले इस मंदिर (thousand pillar temple) को त्रिकुटल्यम के नाम से भी जाना जाता हैं.इस मंदिर के प्रवेश द्वार पर स्थित काले पत्थर को तराश कर बनायीं गयी नंदी बैल की प्रतिमा बहुत ही भव्य और शोभायमान प्रतीत होती हैं.काकतीय वास्तुकला की बेहतरीन कारीगरी वाला सबसे उत्कृष्ट उदाहरण वाला हजार खम्बे वाला मंदिर हैं.मंदिर से लगा हुआ सुन्दर उपवन मंदिर की शोभा में वृद्वि करता हैं.दक्षिण भारत के प्राचीन और भव्य मंदिरो में से एक हजार खम्बे वाला मंदिर है.इसके शानदार नक्काशी और बेहतरीन शिल्पकला के लिए इस मंदिर का नाम हजार खम्बे (thousand pillar temple)वाला मंदिर पड़ा हैं.

पद्माक्षी मंदिर- Padmakshi Temple

12 वी शताब्दी में स्थापित पद्माक्षी मंदिर (Padmakshi Temple) एक प्राचीन और भव्य मंदिर की सरंचना हैं ,यह मंदिर पद्मक्षी देवी को समर्पित हैं,इसके प्रवेश द्वार पर काळा ग्रेनाइट से बना एक भव्य खम्बा इस मदिर को अनुपम स्वरुप प्रदान करता हैं.अन्नाकोण्डा खम्बा के नाम से प्रसिद्द यह खम्बा अपनी खूबसूरत सरंचना के लिए विख्यात हैं.इस मंदिर में खम्बो पर की गयी बेहतरीन नक्काशी के लिए किये कई लोग इसे जैन तीर्थ भी मानते हैं.

भद्रकाली मंदिर वारंगल- BadrakaliTemple

वारंगल का प्रसिद्द भद्रकाली मंदिर (BadrakaliTemple) पुलकेशी द्वितीय ने बनाया था.यह मंदिर 625 ईसा पूर्व बनवाया गया था.इस मंदिर में 2 .7 * 2 .7 मीटर लम्बी शिला पर माँ भद्रकाली की तस्वीर बनायी गयी हैं.जो बहुत ही भव्य और उत्तम हैं, माँ के आठों हाथो में शास्त्र विद्द्यमान हैं.हैं.देवी भद्रकाली के प्राचीनतम मंदिरो में से एक यह मंदिर बहुत भव्य रूप से निर्मित हैं.मंदिर के निर्माण में चालुक्य वास्तुकला शैली का प्रयोग किया गया हैं.

भद्रकाली मंदिर भद्रकाली तालाब के तट पर स्थित हैं.मंदिर कक्ष में माँ का वहां सिंह भी विराजमान हैं,इसके अलावा देवी उमा , हनुमान और नवग्रह की प्रतिमा भी मौजूद हैं..मंदिर में भीतरी ख़ूबसूरती के साथ इसके आस पास का वातावरण भी बेहद मनोरम और नैसर्गिक सौंदर्य से परिपूर्ण है, मंदिर के आस पास प्राकृतिक चट्टानें हैं.जो मंदिर की ख़ूबसूरती को बढ़ाने में मुख्य भूमिका हैं.

रामप्पा मंदिर-  Ramappa Temple

आंध्र प्रदेश के वारंगल जिले में स्थित रामप्पा मंदिर(Ramappa Temple) काकतीय वंश के राजा गणपति देव की देन हैं.राजा गणपति देव ने अपने शिल्पकार रामप्पा से कहकर एक ऐसे मंदिर को बनाने की बात कही , जो वर्षो तक टिका रहे . शिल्पकार रामप्पा ने अपनी शिल्पकला का अध्भुत परिचय देते हुए इस मंदिर का निर्माण किया, वैसे तो सारे मंदिर देवी देवता के नाम पर रखे जाते हैं, पर शिल्पकार की अद्भुत कला से सम्मोहित होकर राजा गणपति देव इस मंदिर का नाम शिल्पकार रामप्पा के नाम पर ही रामप्पा मंदिर रख दिया.

रामप्पा मंदिर (Ramappa Temple) उत्कृष्ट शिल्पकला की कारीगरी का बेहतरीन उदाहरण हैं. इस मंदिर के निर्माण में जिन पत्थरो का प्रयोग हुआ , वह वैज्ञानिको के शोध का विषय आज भी बना हुआ हैं.रामप्पा मंदिर आज भी मजबूत और स्थिर हैं , इसके शोध के लिए जब वैज्ञानिको इसके पत्थरो की जांच की तो पाया रामप्पा मंदिर (Ramappa Temple)  के निर्माण में बहुत हलके पत्थरो का निर्माण हुआ, और ये पत्थर पानी में तैरते हैं,यही वजह हैं की रामप्पा मंदिर की मजबूती का .यह शोध का विषय हैं,की आज से 800 वर्ष पूर्व ऐसे पत्थर कहा से लाये गए , ऐसी कौन सी तकनीक थी?

रामप्पा मंदिर 6 फ़ीट ऊंचे प्लेटफॉर्म पर स्थित हैं.इस मंदिर की दीवारों पर महाभारत (Mahabharat) और रामायण (Ramayan) काल के चित्र उकेरे गये हैं, इस मंदिर में 9 फ़ीट ऊंची नंदी की मूर्ति आकर्षण का केंद्र हैं.इस मंदिर के निर्माण में 40 वर्षो का समय लगा.

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