भगवान विष्णु के दस अवतार : जीवन का दर्शन सिखाते हैं हमें

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पृथ्वी के पालक के रूप में श्री हरि को जाना जाता हैं.(Vishnu avatars story ) श्री हरि और भगवान शिव ने हमेशा धरती की संकटो और राक्षसों से रक्षा की हैं. भगवान कृष्ण ने गीता में कहा भी हैं कि:

यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत
अभ्युथानम् अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्
धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे-युगे

जब जब धर्म की हानि होने लगती है और अधर्म आगे बढ़ने लगता है, तब तब मैं स्वयं जन्म लेता हूं । सज्जनों की रक्षा एवं दुष्टों के विनाश और धर्म की पुनःस्थापना के लिए मैं विभिन्न युगों कालों मैं अवतरित होता हूं ।
विष्णु के दस अवतारों के नाम इस प्रकार हैं.

Vishnu avatars Names

1- मत्स्य
2- कूर्म
3- वराह
4- नृसिंह
5- वामन
6- परशुराम
7- राम
8- कृष्ण
9- बुद्ध
10- कल्कि

प्रथम युग में विष्णु के तीन अवतार हुए मत्सय अवतार , कूर्म अवतार , वराह अवतार, नरसिंह अवतार , वामन अवतार , परशुराम अवतार ,और राम अवतार , ये त्रेता युग के अवतार हैं. द्वापर युग में कृष्ण और बलराम अवतार हुए , अब कलयुग के अंत में कल्कि अवतार होगा जिसमे श्री हरि कल्कि के रूप में अवतार लेकर दुष्टो का नाश करेंगे और धर्म की स्थापना करेंगे.और फिर से सतयुग की शुरुवात होगी.

मत्सय अवतार : Matsya  Avtar

Vishnu avatars story

भगवान विष्णु ( Lord Vishnu) ने मत्सय के रूप में धरा की रक्षा की.पुराणों में यह कहानी वर्णित हैं जब सृष्टि में प्रलय काल आने में कुछ वक़्त ही रह गया था,तब सत्यव्रत जिनसे मनुष्य की उत्पत्ति मानी जाती हैं, वे विष्णु के भक्त थे और नदी में पूजन और तर्पण कर रहे थे. तभी उनके हाथो में एक छोटी से मछली आ गयी.

उस बोलती हुयी मछली के कहने पर महाराज सत्यव्रत उसे अपने महल में ले आये , और उसे एक पात्र में रख दिया , अगले दिन उस मछली का आकार बड़ा हो गया , महाराज ने उसे दूसरे पात्र में रखा, परन्तु मछली का आकार बढ़ता ही चला जाता,तब महाराज सत्यव्रत ने मछली से कहा आप कोई साधारण जीव नहीं प्रतीत होती ,

कृपया अपना परिचय दे,भगवान विष्णु मछली से प्रकट हुए और बताया कि आज से 7 दिन बाद प्रलय आने वाला है सृष्टि की रक्षा के लिए मैंने यह अवतार लिया है, आप एक बड़ी सी नाव बना लीजिए और उसमें सभी प्रकार की औषधि और बीज रख लीजिए ताकि प्रलय के बाद फिर से सृष्टि के निर्माण का कार्य पूरा हो सके

प्रलय आने से पहले भगवान सत्यव्रत के पास आए और उनसे कहा कि आप अपनी नाव को मेरी सूंड में बांध दीजिए। सत्यव्रत सप्त ऋषियों सहित सभी प्रकार के बीज और औषधि लेकर नाव पर सवार हो गए और प्रभु के कथनानुसार रस्सी के एक छोर को नाव से और दूसरे छोर को मछली से बांध दिया और प्रलयकाल के अंत तक भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार के सहारे महासागर में तैरते रहे |

मत्स्य अवतार में भगवान हयग्रीव राक्षस जिसने चारो वेद को चुरा लिया था, विष्णु ने हयग्रीव को मारकर चारों वेदों की रक्षा की और जब पुनः सृष्टि का निर्माण हुआ तो ब्रह्मा जी को वेद लौटा दिए .इस तरह भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लेकर प्रलय काल से लेकर सृष्टि के फिर से निर्माण का काम पूरा किया

कूर्म अवतार : Kurma  Avtar

Vishnu avatars images

 

विष्णु के कूर्म अवतार जो पुराणों में वर्णित है, उसमे यह कहानी सामने आती हैं,की जब देवो और असुरो के बीच समुद्र मंथन का कार्य शुरू हुआ. मदरांचल पर्वत को मथनी बनाया गया ,वासुकि नाग की रस्सी बनायी गयी , तब मंदराचल पर्वत को आधार देने के लिए श्री हरि ने कूर्म अर्थात कछुए का अवतार लिया.

समुद्र मंथन के दौरान कई अमूल्य निधियाँ समुद्र से निकली, जिसमे ऐरावत हाथी, कौस्तुभ मणि, माँ लक्ष्मी, हलाहल विष निकला , ज्यू ही विष निकला धरती पर त्राहि त्राहि मच गयी , तब भोलेनाथ (bholenath )  ने हलाहल विष को पिया और अपने कंठ में ही रोका , जिस कारण शिव का नाम नीलकंठ भी कहलाया,

इसे बाद जैसे ही अमृत निकला देवो असुरो में अमृत को लेकर संग्राम छिड़ गया ,तब भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप लेकर दोनों के बीच हो रहे कलह को शांत किया. और विष्णु ने अमृत को देवो में बाँट दिया.

वराह अवतार : Varaha  Avtar

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भगवान विष्णु के द्वारपाल के रूप में जब जय विजय ने सनत ऋषियों को बैकुंठ में जाने से मना किया तो सनत कुमारो ने उन्हें श्राप दिया ,की अगले जन्म में वे राक्षस बनेगे. जब विष्णु को इस बात  का पता चला |  तब उन्होंने जय विजय को कहा तुम दोनों मेरे पार्षद हो इसलिए तुम्हे राक्षस योनि से मुक्ति मेरे द्वारा ही मिलेगी.जय विजय ने हिरण्याक्ष के रूप में जन्म लिया, और पृथ्वी पर देवलोक में हाहाकार मचा दिया, देवो को ऋषि मुनि द्वारा किये जाने वाले यज्ञ से शक्ति प्राप्त न हो इसलिए उन्होंने पृथ्वी को समुद्र में छुपा दिया, भगवान ने पृथ्वी की रक्षा के लिए वराह का अवतार लिया. और राक्षस हिरण्याक्ष को मारकर पृथ्वी को समुद्र से बाहर लाये .इस प्रकार भगवान ने अपने एक पार्षद को राक्षस की योनि से मुक्त किया .

नरसिंह अवतार : Narasimha Avtar

जैसा कि नाम से सिद्ध हैं नरसिंह अवतार( Narasimha avatar of lord Vishnu) भगवान् विष्णु का अर्ध सिंह और अर्ध मानव का अवतार हैं. यह अवतार भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद कि रक्षा के लिए नरसिंह का अवतार लिया , प्रभु के नरसिंह अवतार की कहानी इस प्रकार से हैं , की मृत्यु के बाद जब हिरण्यकश्यप अपने भाई हिरण्याक्ष का संहार करने वाले भगवान विष्णु से नफरत करने लगा , तब उसने ब्रह्मा की तपस्या की और यह वर मांगा कि वह न कि वह न दिन में मरे न रात में , न देव के हाथो मरे न पशु से ,न किसी मानव के हाथो से , न अस्त्र से मरे न शस्त्र से,ब्रह्मा ने उसे वरदान दे दिया . इस वरदान को पाकर वह अत्यंत क्रूर हो गया ,उसने सबको कहा कि में ही भगवान हूँ, मेरी ही पूजा किया करो , लेकिन इन सबसे दूर वह इस बाँट से अनभिज्ञ था ,

कि उसका स्वयं का पुत्र प्रह्लाद ही नारायण का बहुत बड़ा उपासक हैं, जब उसे इस बाँट का पता चला तो उसने अपने पुत्र को बहुत समझाया लेकिन जब प्रह्लाद नहीं माना तो उसने उसे मृत्युदण्ड दिया लेकिन हर बार नारायण भक्ति के कारण प्रह्लाद की रक्षा श्री हरि करते रहे . एक दिन जब उसने स्वयं ही प्रह्लाद को मारने के स्वयं ही प्रह्लाद को मारने दौड़े तब खम्बे को चीरकर नरसिंह भगवान प्रकट हुए , वे न तो नर ही थे न ही पशु उन्होंने हिरण्यकश्यप को अपनी गोद में लिटाया उस वक़्त न दिन था न रात थी वह संध्या की बेला थी उसे किसी भी अस्त्र अथवा शास्त्र से नहीं मारा गया ,उसे नरसिंह भगवान ने अपने नखो से मारा.इस प्रकार ब्रह्मा का वर भी पूरा हुआ , और हिरण्यकश्यप का संहार भी हुआ.

वामन अवतार : Vamana Avtar

वामन विष्णु का मानव के रूप में पहला अवतार था.त्रेतायुग में भगवान विष्णु का यह पहला मानव अवतार था .राजा बलि के दम्भ को पराजित करने के लिए भगवान विष्णु ने वामन के रूप में एक बौने ब्राह्मण के रूप में अवतार लिया ,और बलि के द्वार पर दान मांगने पहुंचे .और याचक बनकर याचना की, राजा बलि के गुरु ने बलि को समझाया की ये विष्णु का छल हैं पर अपनी दान वीरता के लिए प्रसिद्ध राजा बलि ने वामन को उनकी इच्छानुसार तीन पग भूमि दान में दे दी .

भगवान ने तीन पग भूमि में एक पग में पृथ्वी को मापा ,एक पग में देवलोक को तीसरे पग के लिए जब कोई स्थान नहीं तो राजा बलि ने भगवान विष्णु को कहा हे वामन देव आप अपने तीसरे पग को मापने के लिए मेरे शीश पर अपना चरण रख दे, भगवान विष्णु बलि से अत्यंत प्रसन हुए. और उसे सुतल लोक में भेज दिया.वामन जयंती भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाई जाती है.

पशुराम अवतार :  Parashurama Avtar

भगवान परशुराम (Bhagwan Parshuram)  को विष्णु का आवेशावतार भी कहा जाता है. ऋषि जमदग्नि और रेणुका के पुत्र के रूप में भगवान विष्णु ने त्रेतायुग में परशुराम के रूप में अवतार लिया.परशुराम का उल्लेख रामायण , महाभारत ,और कल्कि पुराण में मिलता हैं.

परशुराम ने धरा को 21 बार क्षत्रियो से विहीन किया था.भार्गव के रूप में प्रसिद्ध परशुराम एक ब्राह्मण थे पर कर्म से क्षत्रिय थे. वे जानवरो की भाषा समझने में निपुण थे , और जानवरो से बात भी करते थे.उन्होंने सैन्य शिक्षा केवल ब्राह्मणो को दी , लेकिन भीष्म ,द्रोण और कर्ण इसके अपवाद हैं.

श्री राम अवतार :  Rama Avtar

त्रेता युग में रावण (Ravan ) के आतंक से पृथ्वी से की रक्षा के लिए भगवान राम ( Shri ram )  ने अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के पुत्र राम के रूप में जन्म लिया . जहा पिता की आज्ञा से उन्होंने चौदह वर्ष वन में बिताये , और एक मर्यादा का स्वरुप सबके समक्ष रखा , इस अवतार में भगवान राम ने अनेक राक्षसों का वध किया.

कृष्ण अवतार : Krishna Avtar

द्वापर युग में भगवान विष्णु ने 16 कलाओ के साथ अपने पूर्णावतार में वासुदेव और देवकी के पुत्र कृष्ण के रूप में धरा पर अवतरित हुए .इस अवतार में उन्होंने दुष्ट कंस का संहार किया , और युवास्था में अर्जुन को भगवद्गीता के रूप में कर्म का गीता ज्ञान दिया.भगवान कृष्ण ने इस अवतार में अनेक चमत्कार किये , यह अवतार विष्णु के अवतारों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता हैं.

बुद्ध अवतार : Gautama Buddha Avtar

भगवान विष्णु के 9 वे अवतार के रूप में बुद्ध का उदय हुआ , गौतम बुद्ध (Gautama Buddha ) का जन्म ईसा से 563 साल पहले नेपाल के लुम्बिनी वन में हुआ। उनकी माता कपिलवस्तु की महारानी महामाया देवी थी.सिद्धार्थ के पिता शुद्धोदन कपिलवस्तु के राजा थे इस अवतार में बुद्ध ने सभी को सत्य ज्ञान का उपदेश दिया और हिंसा से दूर रहने की शिक्षा दी.और बौद्ध धर्म की स्थापना की.

कल्कि अवतार :kalki Avtar

भगवान विष्णु का कल्कि अवतार ( Kalki avatar of lord Vishnu) कलयुग के अंत में होगा , दुष्टो को समाप्त कर कल्कि भगवान धर्म की स्थापना करेंगे , श्रीमद्भगवदपुराण में विष्णु के कल्कि अवतार का वर्णन है.विष्णु का यह अवतार निष्कलंक अवतार होगा , संभल के नजदीक विष्णुयश नामक ब्राह्मण के पुत्र रूप में कल्कि भगवान का जन्म होगा.

इस प्रकार विष्णु (Vishnu avatars ) के ये दस अवतार हमारे लिए प्रेरणा हैं.ये अवतार हमें ज्ञान , त्याग , सत्य ,और सही राह पर चलने का ज्ञान देते हैं, और हमें हिंसा , अहंकार ,और असत्य से दूर रहने की शिक्षा देते हैं.

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