जानिये काल सर्प योग कारण और प्रभाव !!!

काल सर्प योग (kaal sarp yog) को अगर हम साधारण भाषा में परिभाषित करे तो यह हमारे किसी पूर्व जन्म के अपराधों का परिणाम हैं,जो हमारी कुंडली में प्रकट होता हैं.काल सर्प योग व्यक्ति ( kaal sarp dosh nivaran ) को आर्थिक और शारीरिक रूप से कमजोर बनाता हैं

काल सर्प योग (kaal sarp yog) को अगर हम साधारण भाषा में परिभाषित करे तो यह हमारे किसी पूर्व जन्म के अपराधों का परिणाम हैं,जो हमारी कुंडली में प्रकट होता हैं.काल सर्प योग व्यक्ति ( kaal sarp dosh nivaran ) को आर्थिक और शारीरिक रूप से कमजोर बनाता हैं, इसके अन्य लक्षणों में व्यक्ति को संतान से सम्बंधित कष्ट होता हैं. संतान बीमार होती हैं, या आर्थिक रूप से समृद्ध होते हुए भी उसे आर्थिक क्षति होती हैं.

कालसर्प योग- kaal sarp yog

काल सर्प योग की स्थिति को अगर हम देखे तो कुंडली में जब सारे ग्रह राहु केतु के बीच में स्थित हो, तब काल सर्प योग बनता हैं.सूर्य , बुध , शनि , चंद्र, मंगल , शुक्र, गुरु जब राहु केतु के मध्य विराजमान हो, तब काल सर्प के योग का निर्माण होता हैं.

पर इन सभी ग्रहो की डिग्री राहु केतु की डिग्री के बीच में स्थित होनी चाहिए , अगर कोई ग्रह राहु केतु की स्थिति के बाहर स्थित हो, तो ऐसी अवस्था में पूर्ण काल सर्प योग (kaal sarp dosh nivaran) नहीं होता , इस अवस्था को आंशिक काल सर्प योग कहा जाता हैं.

राहु केतु की हमारे कुंडली में उपस्थिति कितनी अशुभपूर्ण हैं, इसी के आधार पर हम काल सर्प योग के दोषपूर्ण प्रभाव को समझ सकते हैं, क्यूकि राहु- केतु की अशुभता का आधार ही काल सर्प के प्रभाव के लिए जिम्मेदार होता हैं.

कालसर्प दोष के प्रभाव- kaal sarp dosh ke Prbhav

kaal sarp dosh nivaran

यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में काल सर्प योग (kaal sarp dosh nivaran ) हो तो, उस व्यक्ति की कुंडली में परेशानियों का विभिन्न समस्याओ का झंझावात लगा ही रहता हैं. संतान सम्बन्धी कष्ट , नौकरी से सम्बंधित समस्याएं , विवाह सम्बंधित परेशानी, परिवार से सम्बंधित कष्ट आदि समस्याओ का सामना करना पड़ता हैं. कुछ समस्याएं बिन बुलाये मेहमान की तरह प्रकट हो जाती हैं. काल सर्प योग 12 प्रकार के होते हैं.

कालसर्प दोष के प्रकार

अनंत काल सर्प दोष -अनंत काल सर्प दोष की उपस्थिति यदि कुंडली में हो तो कुंडली के पहले घर में, राहु और सातवे घर में केतु उपस्थित होता हैं. ऐसे व्यक्ति का वैवाहिक जीवन बहुत ही कष्टपूर्ण होता हैं. वाद विवादों में व्यक्ति इतना उलझ जाता हैं , कि उसके जीवन में तलाक तक कि नौबत आ जाती हैं. इस तरह के व्यक्ति का जीवन बहुत ही दुखपूर्ण होता हैं, ऐसी स्थिति में उसके घर से बाहर भी अनैतिक सम्बन्ध बन जाते हैं.

कुलीक कालसर्प दोष– कुलिक काल सर्प दोष व्यक्ति की कुंडली में उपस्थित हो तो उसके दूसरे घर में राहु और आठवे घर में केतु उपस्थित होता हैं, और बाकि ग्रह इन दोनों ग्रहो के बीच में स्थित होते हैं, इसी को कुलीक काल सर्प दोष कहते हैं. ऐसा व्यक्ति गलत आदतों को अपना लेता हैं, सिगरेट , तम्बाकू , शराब सेवन की आदते उसे गलत मार्ग पर धकेल देती हैं.

वासुकि काल सर्प दोष – कुंडली में जब राहु तीसरे ग्रह में,और केतु नवे घर में मौजूद हो तो ऐसी दशा में वासुकि काल सर्प योग उपस्थित होता हैं, ऐसे व्यक्ति को कड़ी मेहनत के बावजूद भी सफलता नहीं मिलती , उसके मेहनत के बावजूद भी वह उचित परिणाम नहीं पाता . आर्थिक सम्पन्नता भी उसे नहीं मिलती.

शंखफल काल सर्प दोष– चौथे घर में राहु और दसवे घर में केतु उपस्थित हो तो ऐसी दशा में शंखफल काल सर्प दोष उत्पन्न होता हैं. ऐसा जातक बचपन से ही गलत कार्यो में पड़कर बिगड़ जाता हैं, यदि समय रहते उपाय नहीं किया गया , तो व्यक्ति कुसंगति में रहकर बिगड़ भी सकता हैं. ऐसी स्थिति में माता पिता उचित कदम उठाकर बच्चो को बचा सकते हैं.

पदम् काल सर्प दोष – पदम् काल दोष की स्थिति में राहु पांचवे घर में और केतु ग्यारहवे घर में मौजूद होता हैं. पदम् काल सर्प दोष की स्थिति में व्यक्ति की शिक्षा प्रभावित होती हैं, और यह स्थिति बहुत ख़राब हो सकती हैं, क्यूकि शिक्षा ही जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अंग हैं . अगर शिक्षा में ही व्यवधान उत्पन्न हो गया तो व्यक्ति का सम्पूर्ण जीवन प्रभावित हो जायेगा , और इस प्रकार उसे रोजगार सम्बन्धी क्षेत्र में भी कष्ट उठाना पड़ सकता हैं.

महापदम काल सर्प दोष – जब राहु छठे घर में और केतु बारहवे घर में मौजूद हो , तो ऐसी स्थिति में महापद्म काल सर्प दोष उत्पन्न होता हैं. नौकरी , बीमारी, संतान सम्बन्धी समस्याएं महापदम काल सर्प दोष से उत्पन्न होती हैं. इस दोष के दौरान व्यक्ति को जेल जाने तक की स्थिति उत्पन्न हो सकती हैं, ऐसे व्यक्ति की नौकरी में भी अस्थिरता उत्पन्न होती हैं.

तक्षक काल सर्प दोष -कुंडली के सातवे घर में राहु और पहले घर में केतु हो , और बाकि ग्रह इन दोनों के मध्य में स्थित हो तो तक्षक काल सर्प दोष उत्पन्न होता हैं. इस स्थिति में व्यक्ति को वैवाहिक जीवन से सम्बंधित परेशानी उत्पन्न होती हैं विवाह विलम्ब से होता हैं.और विवाह होने के बाद भी पति पत्नी के सम्बन्धो में मधुरता नहीं रहती हैं.

कर्कोटक काल सर्प दोष– कर्कोटक काल सर्प दोष के दौरान राहु आठवे घर में और केतु दूसरे घर में मौजूद होता हैं, कर्कोटक काल सर्प दोष के दौरान व्यक्ति की वाणी पर सबसे बुरा प्रभाव पड़ता हैं .वह हमेशा कटु वचनो का प्रयोग करता हैं, ऐसे में उसके सम्बन्ध सभी से ख़राब हो जाते हैं. इसके अलावा उसके खाने पिने की आदते भी दुष्प्रभावित होती हैं.

शंखनाद काल सर्प दोष– जब राहु नवे घर में और केतु तीसरे घर में मौजूद हो तो , शंखनाद काल सर्प दोष मौजूद होता हैं. और बाकि ग्रह उनके मध्य में स्थित होते हैं, शंखनाद काल सर्प दोष में व्यक्ति की किस्मत या उसका भाग्य उसे उचित परिणाम नहीं देता ऐसे में व्यक्ति को बहुत संघर्ष करना पड़ता हैं.और स्थिति अभी इतनी ख़राब हो जाती हैं की व्यक्ति के बने बनाये कार्यो में भी व्यवधान उत्पन्न हो जाता हैं.

घटक कालसर्प दोष – घटक काल सर्प दोष के दौरान जब राहु दसवे घर में और केतु तीसरे घर में मौजूद हो तो , ऐसी स्थिति में घटक काल सर्प दोष उत्पन्न होता हैं. और यह दोष व्यक्ति के नौकरी और उसके जीवन पर बुरा प्रभाव डालता हैं, व्यक्ति के प्रमोशन के मार्ग में बाधा आती हैं. और सीनियर अधिकारियो से सम्बन्ध भी मधुर नहीं बने रहते हैं. नौकरी से सम्बंधित परेशानी में व्यक्ति को अपना रोजगार भी बदलना पड़ता हैं, जिसकी वजह से उसे माता-पिता से भी दूर जाना पड़ सकता हैं.

विषधर काल सर्प दोष– राहु जब ग्यारहवे स्थान पर हो और केतु चौथे स्थान पर हो ,और सभी ग्रह इनके बीच में स्थित हो, तभी तब विषधर काल सर्प दोष उत्पन्न होता हैं. इस से प्रभावित जातक को आँख और ह्रदय से सम्बंधित परेशानी का सामना करना पड़ सकता हैं,व्यक्ति की स्मरण शक्ति भी क्षीण हो जाती हैं. आर्थिक समस्याओ से भी जूझना पड़ सकता हैं.जिसका प्रभाव उसके अध्ययन कार्य में भी पड़ सकता हैं.

शेषनाग काल सर्प दोष– शेषनाग काल सर्प दोष में राहु बारहवे स्थान में और केतु पांचवे स्थान पर हो तो शेषनाग काल सर्प दोष उत्पन्न होता हैं. ऐसी स्थिति में, व्यक्ति के छिपे हुए शत्रु अधिक होते हैं, ये शत्रु गुप्त रूप से उसे नुक्सान पहुंचाते हैं, और उसका स्वास्थ्य भी साधारण ही रहता हैं.

kaal sarp dosh nivaran mantra

kaal sarp dosh nivaran images

काल सर्प दोष निवारण मंत्र के लिए ज्योतिषी दो मंत्रो का जाप करने की सलाह देते हैं, काल सर्प दोष दूर करने के लिए पहला मंत्र पंचाक्षरी मंत्र और दूसरा मंत्र महामृत्युंजय मंत्र हैं.इन मंत्रो का प्रतिदिन 108 बार जाप किया जाना चाहिए , इस मंत्र के अलावा राहु के बीज मंत्र का जाप प्रतिदिन 108 बार करना चाहिए.

kaal sarp dosh nivaran  puja samagri

kaal sarp dosh nivaran photo

काल सर्प दोष पूजा के निवारण (kaal sarp dosh pooja nivaran )  हेतु पूजा बहुत आवश्यक हैं, क्यूकि काल सर्प योग व्यक्ति को राजा से रंक बना सकता हैं.काल सर्प दोष पूजा के लिए हमें पूजा से सम्बंधित जो सामग्री चाहिए उसका विवरण इस प्रकार से हैं.
श्री फल =1
2) सुपारी = 11
3)लौंग = 10 ग्राम
4)इलायची =10 ग्राम
5) पान के पत्ते = 7
6) रोली =100 ग्राम
7) मोली = 5 गोली
8) जनेऊ = 11
9) कच्चा दूध = 100 ग्राम
10) दही = 100 ग्राम
11) देशी घी = 1 किलो ग्राम
12) शहद = 50 ग्राम
13) शक्कर = 500 ग्राम
14) साबुत चावल. = 1 किलो 250 ग्राम
15) पंच मेवा = 250 ग्राम
16) पंच मिठाई = 1किलो ग्राम
17) ॠतु फल = श्रद्धा अनुसार
18) फूल माला,फूल = 5
19)धूप, अगरबत्ती =1-1 पैकेट
20) हवन सामग्री = 1किलो ग्राम
21) जौ = 500 ग्राम
22) काले तिल =1 किलो ग्राम
23) कमल गठ्ठा =20 रू
24) लाल चन्दन = 20 रू
25) पीली सरसों = 20 रू
26) गुग्गल = 20 रू
27) जटामसी = 20 रू
28) तिल का तेल = 1 किलो ग्राम
29) सूखा बेल गीरी = 20 रू
30)भोज पत्र =20 रू
31)मिट्टी के बड़ा दीया = 2
32) मिट्टी के छोटे दीये =11
33) रूई = 1पैकेट
34) नव ग्रह समिधा = 1 पैकेट
35) गोला = 1
36) काली मिर्च = 100 ग्राम
37) पीला कपड़ा = सवा मीटर
38) कपूर = 11 टिक्की
39)लोहे की कटोरी = 1
40) दोने = 1 पैकेट
41) आम के पत्ते = 11पत्ते
42)आम की लकडियां = 5किलो ग्राम
43) साबुत उडद की दाल = 250 ग्राम
44) लकड़ी की चौकी = 1
45) बेल पत्री = 11
46)शिव लिंग = 1
47) नाग = 9

kaal sarp dosh nivaran yantra

kaal sarp dosh nivaran yantra

काल सर्प दोष निवारण यन्त्र (kaal sarp dosh nivaran yantra) व्यक्ति को काल सर्प के के दुष्प्रभाव से बचाता हैं, और व्यक्ति का मंगल करता हैं. काल सर्प योग निवारण यन्त्र को प्रतिदिन दुग्ध से स्नान कराये और फूल अर्पित करे.

kaal sarp dosh nivaran lal kitab

लाल किताब (lal kitab) में काल सर्प से सम्बंधित दोषो को दूर करने के अनेक उपाय दिए गए हैं, इस उपाय से काल सर्प से सम्बंधित परेशानी से छुटकारा पाने के उपाय दिए गए हैं , जो निम्नkaal sarp dosh nivaran lal kitabखित हैं.

काल सर्प वाले जातक को अपने दाहिने हाथ में मोरपंख को सफ़ेद कपडे में बाँधना चाहिए .

राहु की दशा में ,व्यक्ति को लाल उन का धागा अपने गले में धारण करना चाहिए .

kaal sarp dosh nivaran lal kitab

घर बनाते समय व्यक्ति आजकल पूरे घर को पक्का कर दे रहे हैं. घर में कुछ हिस्सा कच्चा छोड़ देना चाहिए,और वहा पर मनीप्लांट का पौधा लगा देना चाहिए .

लाल किताब (lal kitab ke upay ) के अनुसार बनायीं गयी किसी व्यक्ति की कुंडली में दसवे घर में यदि शुक्र बैठा हो अगर ऐसा व्यक्ति बीमार अधिक चल रहा हो , तो उस व्यक्ति को बीमारी से मुक्त करने के लिए उसके परिवार के लोगो को उसके निमित्त कपिला गाय का दान कर देना चाहिए यदि उस व्यक्ति की आयु अच्छी होगी तो वह शीघ्र ठीक हो जायेगा.

kaal sarp dosh nivaran mandir

काल सर्प दोष  (kaal sarp dosh nivaran) का प्रभाव मुक्त करने के लिए भारत में कई ऐसे काल सर्प दोष निवारण मंदिर भी हैं जहा सिर्फ दर्शन और पूजा से काल सर्प दोष का दोष कट जाता हैं.

नासिक के पास स्थित त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिग स्थित है यहां पर कालसर्प दोष निवारण के लिए पूजा की जाती है

इलाहबाद यानि संगम नगरी में भी काल सर्प दोष के लिए पूजा की जाती हैं.

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बद्रीनाथ धाम (badrinath Dham ) भी काल सर्प दोष के निवारण के लिए सहायक हैं.

दक्षिण भारत के तंजौर जिले में त्रिनागेश्वरम नाग  मंदिर हैं जहा यहां कालसर्प दोष को समाप्त करने के लिए राहू काल में राहू का अभिषेक कराने से हमेशा के लिए  काल सर्प दोष से छुटकारा मिल जाता है

काल सर्प योग (kaal sarp dosh ) हमारे पूर्व जन्मो के अपराधों का परिणाम हैं, जो हमारी कुंडली में प्रकट होता हैं. पारा जहा समस्या हैं वहा समाधान भी हैं, और काल सर्प (kaal sarp) के प्रभाव से मुक्ति पाने लिए इसके उपाय भी हैं , आप मंदिरो में जाकर भी काल सर्प योग की पूजा करवाके इसके प्रभाव से मुक्ति पा सकते हैं.

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