एक अनसुना रहस्य, विभीषण ही नहीं रावण की पत्नी मंदोदरी ने भी बताया था रावण के वध का यह राज !

ऐसे में विभीषण ने राम को बताया की उस विशेष तीर के द्वारा ही रावण का वध किया जा सकता है अन्यथा कोई भी अस्त्र उसका वध नहीं कर सकता है. तथा यह राज सिर्फ मंदोदरी की पत्नी को ही पता था.

बस फिर क्या था हनुमान जी ने एक ज्योतिषाचार्य का रूप धारण किया था. लंका में जाकर वहां एक स्थान से जाकर दूसरे स्थान में घूमने लगे तथा वहां जाकर लोगो का भविष्य बताने लगे. कुछ ही समय में हनुमान रूपी ज्योतिष की खबर पुरे लंका में फेल गयी.

उस ज्योतिष की खबर रावण की पत्नी मंदोदरी तक पहुंची तथा मंदोदरी ने उनकी विशेषता जान उत्सुकतावश उन्हें अपने महल में बुलवा लिया. हनुमान रूपी ज्योतिष ने मंदोदरी को रावण के संबंध में कुछ ऐसी बात कही जिसे सुन मंदोदरी आश्चर्यचकित हो गई.

बातो ही बातो में हनुमान जी मंदोदरी को रावण के संबंध उसे ब्र्ह्मा जी से वरदान के रूप में प्राप्त तीर के बारे में बतलाया. साथ ही साथ हनुमान जी ने यह भी जाहिर करने की कोशिश की कि जहां भी वो बाण पड़ा है, वह सुरक्षित नहीं है.

हनुमान जी चाहते थे कि मंदोदरी उन्हें किसी भी तरह उस बाण का स्थान बता दे.

मंदोदरी पहले तो ज्योतिषाचार्य को आश्वस्त करने की कोशिश करती रही कि वो बाण सुरक्षित है लेकिन हनुमान जी की वाकपटुता की वजह से मंदोदरी बोल ही पड़ी कि वह बाण रावण के सिंहासन के सबसे नजदीक स्थित स्तंभ के भीतर चुनवाया गया है.

यह सुनते ही हनुमान जी ने अपना असल स्वरूप धारण कर लिया और जल्द ही वह बाण लेकर श्रीराम को के पास पहुंच गए. राम ने उसी बाण से फिर रावण की नाभि पर वार किया. इस तरह रावण का अंत हुआ.

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