Akshaya Tirtiya Ka Mahatw Aur Pujan अक्षय तृतीया का महत्व और पूजन

“न क्षयति इति अक्षय” वैसे तो वर्ष में बारह महीनो की शुक्ल पक्ष की तृतीया शुभ होती हैं.पर वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया  अक्षय तृतीया( Akshaya Tirtiya )का विशेष महत्व हैं,इस दिन किये गए शुभ कार्य को श्रेष्ठ माना गया हैं.इस वर्ष अक्षय तृतीया(Akshaya Tirtiya ) 18 अप्रैल को मनाई जाएगी.मुहूर्त शास्त्र में अक्षय तृतीया का दिन अत्यंत शुभ माना गया हैं.इस दिन महर्षि परशुराम का जन्म होने के कारण इसे परशुराम तीज( Akshaya Tirtiya )भी कहा जाता हैं.इस दिन (Akshaya Tirtiya )जिनका विवाह होता हैं ,उनका सौभाग्य अखंड माना जाता हैं.इस दिन को स्वयं सिद्धि मुहूर्त भी कहा गया हैं , जिस दिन हम बिना पंचांग देखे कोई भी शुभ कार्य कर सकते हैं.

Akshaya Tritiya Manane Ki Vidhi | अक्षय तृतीया मनाने की विधि

नित्य क्रिया से निवृत होकर स्नान करके भगवान् विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए , हवन करने के बाद पूर्वजो का तर्पण करा चाहिए ,पुराणों में मान्यता हैं ,इस दिन बिना पिंड बनाये श्राद्ध कर्म करना चाहिए, और ब्राह्मणो को भोजन कराना चाहिए. दान में कलश ,पंखा ,खड़ाऊ , दान करना चाहिए .महिलाओ के लिए अक्षय तृतीया का विशेष महत्व हैं. चैत्र मास में चैत्र गौरी का इस दिन विसर्जन किया जाता हैं.इस दिन महिलाये सुहागिन स्त्रियों को घर बुलाकर हल्दी और कुमकुम लगाकर पैर छूकर आशीर्वाद लेती हैं.और उपहार या भेंट प्रदान करती हैं.

Til Tarpan: तिल तर्पण:

इस दिन पूर्वजो को तिल और देवताओ को जल अर्पण करने का रिवाज हैं.तिल अर्पण से जहा सात्विकता का भाव प्रतीत होता हैं,वही जल अर्पित करने से शुद्ध भाव का प्रतीक प्राप्त होता हैं.तिल अर्पण करने का अर्थ हैं ईश्वर द्वारा ही मुझसे सब कुछ करवाया जा रहा हैं.व्यक्ति के मन में अहम्,लोभ और आदि कलुषित भावनाये नहीं होनी चाहिए.

Akshya Tritiya Ka Mahatw अक्षय तृतीया का महत्व

देवी पार्वती ने इस व्रत(Akshaya Tirtiya )की महत्ता वर्णित करते हुए कहा था कि इस व्रत को करके वे हर जन्म में शिव के साथ आनंदित रहती है. कुवारी कन्याओ को अक्षय तृतीया व्रत उत्तम पति की प्राप्ति के लिए करना चाहिए.
जिन महिलाओ को संतान नहीं हैं, वे संतान प्राप्ति के लिए अक्षय तृतीया का व्रत कर सकती है.देवी इन्द्राणी ने अक्षय तृतीया का व्रत कर पुत्र जयंत को प्राप्त किया था.
प्रजापति दक्ष की पुत्री रोहिणी ने बिना नमक खाये अक्षय तृतीया व्रत को किया और चंद्र जैसा पति पाया .

भूमि पूजन , नए व्यापार का आरम्भ , विवाह, वाहन आदि की खरीदारी,यज्ञोपवीत संस्कार , नामकरण ,आदि के लिए अक्षय तृतीया से शुभ कोई भी दिन नहीं हैं ,बिना पंडित को पूछे , पंचांग दिखाए अक्षय तृतीया के दिन कोई भी शुभ कार्य करे जिसका फल अक्षय होगा अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) के दिन आभूषण ,स्वर्ण, आदि की खरीदारी शुभ मानी जाती हैं.

Akshaya Tritiya Se Samdandhit Mahatwpoon Jankari अक्षय तृतीया से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारी:

हमारे हिन्दू ग्रंथो के अनुसार(Akshaya Tirtiya )दिन से त्रेता युग आरंभ हुआ था.विष्णु पुराण में कहा गया हैं की जो व्यक्ति ये व्रत करता हैं वह सब तीर्थो का फल पा जाता है

भगवान श्री कृष्ण ने कहा हैं – इस दिन स्नान,जप ,तप ,होम और दान जो कुछ भी किया जाता हैं वह सुब अक्षय हों जाता हैं इसलिए इसे “अक्षय तृतीया” के नाम से जाना जाता हैं

अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान् विष्णु के 24 अवतारों में भगवान् परशुराम, नर नारायण,हयग्रीव का अवतार अक्षय तृतीया के दिन ही हुआ था

आज के दिन माँ गंगा का अवतरण धरती पर हुआ था

द्रौपदी को चीर हरण से कृष्ण ने आज के दिन बचाया था .

श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट आज ही के दिन से खुलते हैं.

श्री बाके बिहारी मंदिर वृन्दावन में आज ही के दिन विग्रह चरण के दर्शन होते हैं,साल भर उन्हें वस्त्र से ढका जाता हैं.

अक्षय तृतीया के दिन ही महाभारत युद्ध समाप्त हुआ था

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