भोलेनाथ को चढ़ा दे सबसे प्यारी चीज होगी हर इच्छा पूरी

शिव को अतिप्रिय पत्रों में बिल्व पत्र का महत्व सर्वाधिक हैं. बिल्व पत्ते के तीन पत्ते शिव के तीन नेत्रों के प्रतीक अगर हम कहे तो कोई आश्चर्य नहीं होगा, शिव को बिल्व पत्र सर्वाधिक प्रिय हैं, शिव को बिल्व पत्र चढ़ाने का महत्व इतना हैं कि व्यक्ति जन्मो के पाप से मुक्त हो शिव कि शरण में चला जाता हैं. बिल्व पत्र कि महत्ता का वर्णन करते हुए धर्म ग्रंथो में कहा गया हैं कि, बिल्व पत्र का पौधा लगाने से और उसकी उचित देखभाल करने से महादेव कि कृपा और उनकी भक्ति प्राप्त होती हैं.

bilva patra leaves benefits

बेल पत्र एक (bilva patra leaves benefits) औषधीय गुणों वाला पेड़ हैं, इसके पत्ते और फल दोनों ही गुणकारी हैं. इसके वृक्ष को बहुत ही पवित्र और गुणकारी माना गया हैं. इसके फल एक महत्वपूर्ण विशेषता ये भी हैं कि एक बार पीले होकर दुबारा हरे हो जाते हैं, बेल पत्री के पत्तो का महत्व इस प्रकार हैं.

1- बेल पत्री के पत्तो का रस को पकाकर पीने से पुराने से पुराना बुखार भी ठीक हो जाता हैं, और छोटे बच्चो को बेल पत्री का रस एक चम्मच पिलाने से दस्त सम्बन्धी परेशानी दूर हो जाती हैं.

2- सर्दी , बुखार आने पर बेलपत्री का रस पी लेने से मौसमी बुखार या मौसमी बीमारियों में बहुत लाभ होता हैं.

3- आजकल acidity एक आम समस्या हो गयी हैं, चटपटा मसालेदार भोजन और खाने में अनियमितता या बेवक़्त खाना एसिडिटी के लिए जिम्मेदार हैं . बेल पत्री के पत्तो का रस शहद मिलकर पी लेने से एसिडिटी में फायदा होता हैं.

4- दूध के साथ जीरा और बेल पत्र पीसकर लेने से से महिलाओ को होने वाले अधिक मासिक स्त्राव और श्वेत प्रदर जैसी परेशानियों में बहुत अधिक लाभ होता हैं, महिलाओ के लिए बेल पत्र का रस बहुत अधिक लाभकारी हैं.

5- जिन लोगो को सांस सम्बन्धी बीमारी जैसे अस्थमा या दमा सम्बन्धी परेशानिया हैं, वे बेल के पत्तो का रस पीकर स्वस्थ्य लाभ ले सकते हैं. पेट के कीड़ो को नष्ट करने के लिए बेल के पत्तो का रस लाभकारी हैं.

6- वर्षा ऋतू में होने वाली बीमारियों में, जैसे बुखार , खासी, सर्दी में बेल पत्री के रस का काढ़ा बहुत ही फायदेमंद और गुणकारी होता हैं.

7- गर्मियों में अत्यधिक तापमान में होने वाली समस्याओ में जैसे लू  लगना , सर दर्द . पेट की तकलीफो आदि में बेल का शरबत बहुत ही गुणकारी और लाभकारी पेय हैं जिसका सेवन किसी भी तरह से नुकसानदायक नहीं होगा. और आपको गर्मी से भी बचाएगा I

bilva patra fruit

बेल वृक्ष का फल (bilva patra fruit)भी उतना ही गुणकारी और लाभवान हैं , जितनी बेल की पत्तिया . बेल का फल बहार से जितना कठोर होता हैं, अंदर से वह उतना ही मुलायम और स्वास्थ्य वर्धक होता हैं. बेल फल खाने के कई फायदे हैं, बेल फल का प्रयोग दवाइया बनाने में , इसे अलावा विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाने में किया जाता हैं. बेल में पाए जाने वाले स्वास्थवर्धक चीजों में प्रोटीन विटामिन सी बहुतायत मात्रा में पाए जाते हैं. आइये जानते में बेल के स्वास्थ्यवर्धक गुणों के बारे में.

बेल का फल (bilva patra fruit)औषधीय गुणों से युक्त हैं, इसमें पाए जाने वाले कई तत्व गुणकारी हैं, पेट सम्बन्धी परेशानियों के लिए बेल का शरबत (bilva patra fruit) अति उत्तम पेय हैं. कब्ज आदि समस्याओ में बेल का शरबत नियमित रूप से पीने पर उदार सम्बन्धी सभी विकार दूर हो जाते हैं.

मधुमेह के रोगियों के लिए बेल बहुत ही फायदेमंद हैं, इसके पत्तियों का रस नियमित रूप से पीने से मधुमेह की बीमारी में चमत्कारिक रूप से लाभ मिलता हैं.

पके हुए सूखे बेल का चूर्ण बनाकर गरम दूध के साथ प्रतिदिन लेने से शरीर में खून की कमी दूर होती हैं. बेल शरीर में रक्त की कमी से होने वाले बीमारियों को दूर करने में सहायक हैं.

गर्मियों में डायरिया की शिकायत अक्सर हो जाती हैं. , खासकर छोटे बच्चो को डायरिया अक्सर हो जाता हैं , ऐसे में बेल का सेवन डायरिया से बचने का अचूक उपाय हैं, गर्मियों में यदि संभव हो तो बेल का सेवन अधिक से अधिक करना चाहिए. बेल का सेवन करने से उदर में शीतलता होती हैं. और पेट से सम्बंधित होने वाली बीमारियों को दूर करने में अत्यधिक लाभदायक हैं.

बेल की पत्तिया और बेल का शरबत गर्मियों में लू लगने पर बहुत रहत देता हैं, लू लगने पर बेल की पत्तियों का रस पैर के तलवो और छाती में लगाने पर तुरंत आराम पहुँचाता हैं.

खांसी में भी बेल बहुत राहत पहुँचाता हैं. खांसी में छाती में जमा कफ के दौरान बेल का गूदा पका ले इसके बाद इसे छानकर थोड़ा थोड़ा पिए , कितनी भी  खांसी हो तुरंत असर करेगा .

bel patra todne ke niyam

बेल पत्री शिव को( bel patra todne ke niyam) चढ़ाये जाने वाले पत्तो में से एक एक हैं, शिव को बेल पत्री बहुत प्रिय हैं. बेल पत्री शीतलता प्रदान करती हैं. बेल पत्री शिव को चढ़ाने से शिव प्रसन्न होते हैं, और सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. बेल पत्री को चढ़ाने और तोड़ने के भी नियम हैं जो इस प्रकार हैं.

1-चतुर्दशी, सोमवार संक्रांति , चतुर्थी, अष्टमी, नवमी को बेल पत्री नहीं तोड़नी चाहिए .

2- सोमवार का दिन शिव का दिन होता हैं, इसलिए इस दिन या उपरोक्त दी गयी तिथियों को छोड़कर किसी भी दिन बेल पत्री तोड़कर शिव को अर्पित करनी चाहिए.

3-बेल पत्री यदि नहीं मिल पा रही हो. तो किसी और और के द्वारा चढ़ाई गयी बेल पत्री को धोकर दुबारा चढ़ाया जा सकता हैं.

4- बेल पत्री को तोड़ने से पूर्व बेल पत्रों के वृक्ष को और पत्तिया तोड़ने के बाद बेल पत्री के वृक्ष को मन ही मन प्रणाम करना चाहिए.

5- बेल पत्री यद्यपि आसानी मिल जाये हे,.पर यदि कभी नहीं मिल पाए तो शिव को हाथ जोड़कर क्षमा मांग लेनी चाहिए,

 

शिव पर कैसे चढ़ाये बेलपत्र / bel patra on shivling

1- बेल पत्री का नरम और मुलायम भाग ही शिव लो अर्पित करना चाहिए. बेल पत्री ऊपर को ओर रखकर चढ़ानी चाहिए.

2- बेलपत्र जितने अधिक पत्र के हो उतने ही अधिक शुभ माने जाते हैं.

3- बेलपत्र में चक्र ओर व्रज के चिन्ह नहीं होने चाहिए .

4- बेलपत्री की अनुपलब्धता में बेल वृक्ष के दर्शन कर लेने मात्र से ही पाप नष्ट हो जाते हैं.

 

bilva patra stotra

शिव को अतिप्रिय वस्तुओ में बिल्व पत्र (bilva patra stotra) की महत्ता का वर्णन करना शब्दों से परे हैं, बिल्वपत्र को चढ़ाने का पुण्य एक करोड़ कन्या दान के बराबर माना जाता हैं. बिल्व पत्र स्त्रोत इस प्रकार हैं.

त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम् ।
त्रिजन्मपापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥

त्रिशाखैः बिल्वपत्रैश्च ह्यच्छिद्रैः कोमलैः शुभैः ।
शिवपूजां करिष्यामि ह्येकबिल्वं शिवार्पणम् ॥

अखण्ड बिल्व पत्रेण पूजिते नन्दिकेश्वरे ।
शुद्ध्यन्ति सर्वपापेभ्यो ह्येकबिल्वं शिवार्पणम् ॥

शालिग्राम शिलामेकां विप्राणां जातु चार्पयेत् ।
सोमयज्ञ महापुण्यं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥

दन्तिकोटि सहस्राणि वाजपेय शतानि च ।
कोटिकन्या महादानं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥

लक्ष्म्यास्तनुत उत्पन्नं महादेवस्य च प्रियम् ।
बिल्ववृक्षं प्रयच्छामि ह्येकबिल्वं शिवार्पणम् ॥

दर्शनं बिल्ववृक्षस्य स्पर्शनं पापनाशनम् ।
अघोरपापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥

काशीक्षेत्रनिवासं च कालभैरवदर्शनम् ।
प्रयागमाधवं दृष्ट्वा ह्येकबिल्वं शिवार्पणम् ॥

मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे ।
अग्रतः शिवरूपाय ह्येकबिल्वं शिवार्पणम् ॥

बिल्वाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् शिवसन्निधौ ।
सर्वपाप विनिर्मुक्तः शिवलोकमवाप्नुयात् ॥

॥ इति बिल्वाष्टकम् ॥