एक रोचक कथा, कैसे हुआ भगवान शिव जन्म ?

Bhagwan Shiv ka janam kaise hua in hindi

दोस्तों आज हम आपको बताने जा रहे है की bhagwan shiv ka janam kaise hua तथा इससे सम्बन्धित एक रोचक कथा. हमारे हिन्दू धर्म में 18 पुराण कहे गए है. इन पुराणों में भगवान की महिमा एवम कथा का वर्णन है. इन अलग अलग पुराण में अनेक बाते समान होने के साथ कुछ बाते काफी हद तक अलग लग भी है.


इसे भगवान शिव के जन्म के साथ ही अन्य अनेक देवताओ के जन्म एवम उत्त्पति से सम्बन्धित कथाये भी है. वेदों में भगवान शिव को निराकार रूप बतलाया गया है. जबकि पुराणों में सभी देवो के रूप के साथ उनके उतपत्ति का उलेख भी बतलाया गया है.

Bhagwan Shiv ka janam kaise hua in hindi

श्रीमद भागवत के अनुसार bhagwan shiv ke janam ki katha इस प्रकार है की जब एक बार ब्रह्मा और विष्णु को अहंकार हुआ की वे सबसे श्रेष्ठ है तो भगवान शिव ने एक विशाल ज्योति के रूप में उनके सामने प्रकट हुए , वह ज्योति अत्यंत विशाल थी जिसका कोई छोर नहीं था. भगवान शिव ने ज्योति रूप में उनके सामने एक शर्त रखी की जो भी मेरे छोर को पहले पा जायेगा वह श्रेष्ठ होगा.

शिव की इस बात को सुन भगवान विष्णु और ब्रह्मा दोनों उस ज्योति के छोर को ढूढने चल पड़े. परन्तु काफी चलने के बाद भगवान विष्णु समझ गए की यह विशाल ज्योति साधारण नहीं है बल्कि भगवान की माया है. अतः उन्होंने अपनी हर मान ली परन्तु ब्रह्मा अहंकार में डुबे उस ज्योति के पास आये और बोले की मेने ज्योति का छोर पा लिया है. तब भगवान शिव प्रकट हुए तथा उन्होंने ब्रह्मा जी का झूठ बताते हुए उनका अहंकार चूर किया.

bhagwan shiv ke janam ki katha in vishnu puran

विष्णु पुराण के अनुसार भगवान शिव का जन्म विष्णु के माथे के तेज से हुआ था तथा ब्रह्म देव भगवान विष्णु के नाभि से प्रकट हुए थे. ऐसा माना जाता है की भगवान शिव का जन्म विष्णु भगवान के माथे होने की कारण शिव सदैव योग मुद्रा में रहते है.

bhagwan shiv ke janam se judi ek anya ktha

bhagwan shiv ke  janam की एक अन्य कथा के अनुसार भगवान शिव के बाल रूप का वर्णन किया गया है, यह कहानी शायद भगवान शिव का एकमात्र बाल रूप वर्णन है। यह कहानी बेहद मनभावन है। इसके अनुसार ब्रह्मा को एक बच्चे की जरूरत थी। उन्होंने इसके लिए तपस्या की। तब अचानक उनकी गोद में रोते हुए बालक शिव प्रकट हुए। ब्रह्मा ने बच्चे से रोने का कारण पूछा तो उसने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया कि उसका नाम ‘ब्रह्मा’ नहीं है इसलिए वह रो रहा है.

तब ब्रह्मा ने शिव का नाम ‘रूद्र’ रखा जिसका अर्थ होता है ‘रोने वाला’। शिव तब भी चुप नहीं हुए। इसलिए ब्रह्मा ने उन्हें दूसरा नाम दिया पर शिव को नाम पसंद नहीं आया और वे फिर भी चुप नहीं हुए। इस तरह शिव को चुप कराने के लिए ब्रह्मा ने 8 नाम दिए और शिव 8 नामों (रूद्र, शर्व, भाव, उग्र, भीम, पशुपति, ईशान और महादेव) से जाने गए। शिव पुराण के अनुसार ये नाम पृथ्वी पर लिखे गए थे।

Related post: 

bhagwan shiv ka vardan, jane draupadi ka janam kaise hua
bhagwan shiv se judi ek rochak katha in hindi
lord shiva story in hindi

Mereprabhu
Logo
Enable registration in settings - general