कैसे पाएं शनि की वक्र दृष्टि में मनोवांछित फल

shani dev effects

shani dev effects :

जीवन के उतार-चढ़ाव तथा भाग्य में सुख-शांति को प्रदान करने वाले शनि ग्रह मंगलवार रात्रि से वक्री होंगे। 20 जून 2012 तक शनि की वक्र दृष्टि से धनु, मेष तथा कर्क राशि विशेष रूप से प्रभावित रहेगी।

ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला के अनुसार शास्त्रों में शनिदेव का उल्लेख काल पुरुष के दुख रूप में बताया गया है। शनि की तृतीय, सप्तम तथा दशम दृष्टि विशेष महत्व रखती है। शनि की वक्र दृष्टि में धनु, मेष तथा कर्क राशि उक्त क्रम में आती है। इसलिए इन राशि वालों के लिए यह समय चिंता का रहेगा। जिन जातकों को शनि की साढ़ेसाती या ढैया का प्रभाव चल रहा है, उन पर भी आंशिक प्रभाव रहेगा।

किन्हें मिलेगा मिश्रित फल : मकर, कुंभ, मिथुन, वृषभ, तुला, कन्या, मीन, वृश्चिक तथा सिंह राशि वाले जातक शनि की पनौती तथा लघु पनौती के मिश्रित फल का अनुभव करेंगे।

अनुकूलता ऐसे पाएं :

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शनि की साढ़ेसाती (shani sade sati), ढैया, महादशा, अंतर्दशा तथा प्रत्युंतर दशा सुधारने तथा अपने पक्ष में करने के लिए शनि क‍ी वैदिक साधना उत्तम फल प्रदान करेगी। प्रभावी जातक को शनि के मंत्र ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ का जप, शनि स्त्रोत, शनि स्तवन, महाकाल शनि महामृत्युंजय स्त्रोत, शनिवज्र पिंजर कवच तथा शनि चालीसा (shani chalisa) आदि का पाठ करें। (shani paath) इनका दान करें : शनि की वस्तुओं क्रमशः काली उड़द, काला वस्त्र, काली तिल्ली, राई तथा लोहे के पात्र का दान करें। शनिवार के दिन एक समय भोजन करें तथा भोजन से पूर्व भिक्षुक को इमरती तथा नमकीन का दान करें। उपरोक्त क्रम करने से जातकों को मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी।

जब हनुमान जी ने शनिदेव को फेंका लंका से बहार !