क्या आप जानते है हनुमान के अलावा बाली पुत्र अंगद में भी था 100 योजन समुद्र पार करने का सामर्थ्य, इसलिए नहीं किया समुद्र पार !

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रामायण में भगवान श्री राम का माता सीता की खोज एवं रावण से युद्ध में हनुमान एवं सग्रीव सहित बाली पुत्र अंगद का भी अत्याधिक योगदान था.

अंगद के नाम से जुडी एक बहुत रोचक कथा पुराणों में मिलती है जिसके अनुसार किष्कंधा पति बाली को कोई खुजली जैसी बिमारी थी. बाली ने इस खुजली की बिमारी से मुक्ति प्राप्त करने के लिए अनेक उपाय किये परन्तु कोई समाधान नहीं निकला.

कहा जाता है की जब अंगद का जन्म हुआ था तब बाली ने अपने पुत्र को स्नेह से अपनी छाती से लगाया था, अंगद को छाती से लगाते ही बाली को उसकी खुजली की बिमारी से हमेशा के लिए मुक्ति मिल गई

पुत्र को अंग से लगाने के कारण बाली की बिमारी गई थी इसी कारण बाली ने अपने पुत्र का नाम अंगद रखा था.

भगवान श्री राम का आदेश पाकर माता सीता की खोज में हनुमान, अंगद, जामवन्त आदि वीर एक विशालकाय समुद्र के तट के पास आकर रुके. अपने आँखो के सामने 100 योजन तक फैले विशाल समुद्र को देख सबका उत्साह कम हो गया था.

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तब अंगद ने वहां स्थित सभी वीर वानरों से उनके छलांग लगाने की छमता के बारे में पूछा. तब किसी वानर ने कहा की वह 30 योजन तक छलांग लगा सकता है तो किसी ने कहा की वह 50 योजन तक छलांग लगा सकता है.

ऋक्षराज जामवन्त बोले की वह वृद्ध होने के कारण केवल 90 योजन तक ही छलांग लगा सकते है पर पूरा 100 योजन समुद्र पार नहीं कर सकते. सभी की बात सुनकर तब अंगद बोले की में 100 योजन तक छलांग लगा कर समुद्र पार तो कर लूंगा परन्तु लोट पाउँगा की नहीं इसमें संशय है.

इसके बाद जामवन्त जी ने हनुमान जी को उनके पराक्रम का स्मरण करवाया तथा हनुमान जी ने एक छलांग में ही समुद्र को पार कर लिया.

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परन्तु आखिर अंगद ने क्यों समुद्र पार नहीं किया तथा क्यों उन्हें अपने लंका वापस आने में संशय था. इसक कारण यह था की रावण पुत्र अक्षय को यह आशीर्वाद प्राप्त था की वह अंगद का वध कर सकता था.

अक्षय अंगद का काल होने के कारण अंगद ने समुद्र पार नहीं किया यदि वे ऐसा करते तो अक्षय के साथ युद्ध में उनकी मृत्यु निश्चित थी.

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