हनुमान जी के दो प्राचीन रोचक जिन्हें सुन आप हो जाओगे भाव विभोर | hanuman katha in hindi

hanuman katha in hindi

दोस्तों आज हम आपको दो प्रेणादायी हनुमान कथा ( hanuman katha in hindi ) बताने जा रहे है. ये तो आप लोग जानते है की हनुमान जी का भगवान राम के प्रति सम्पूर्ण समर्पण था वे हमेसा राम नाम की भक्ति में खोये रहते थे.
हनुमान जी के इन दो कथाओं में भी हम हनुमान जी के भगवान राम जी प्रति समपर्ण एव प्रेम भावना को दिखाने जा रहे है.

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एक बार माता सीता ने हनुमान जी से प्रसन्न होकर उन्हें मूल्यवान हीरे का हार भेट स्वरूप प्रदान किया तथा साथ अन्य सेवको को भी मोतियों से जड़ित मूल्यवान वस्तुवे भेट स्वरूप प्रदान करि. जब hanuman जी ने माता सीता द्वारा दिए हार को अपने हाथ में लिया तो उन्होंने उस हार के सभी दानो को बड़े ध्यान से देखा तथा उसके बाद वे उसे हार को मुह से चबा कर तोड़ने लगे.
जब देवी सीता ने हनुमान जी को यह सब करते देखा तो वे हनुमान जी के पास जाकर उनसे बोली आखिर आप ने इतने मूल्यवान भेट को इस तरह क्यों तोड़ दिया. हनुमान जी विन्रम भाव से माता सीता से बोले की इस हार में कही भी आप और प्रभु श्री राम की छवि नही है. जिस में आप दोनों ना बस्ते हो उस हार का मेरे लिए कुछ मोल नहीं इसलिए मेने उस माला को तोड़ दिया. यह सुन दरबार के सभी लोक हक्के बक्के रह गए और भगवान श्री राम ने अपने परम् भक्त हनुमान जी को गले से लगा लिया. इस hanuman katha में हनुमान जी का प्रेम उनके प्रभु के प्रति कितना अगाद्य था यह दर्शाया गया है.

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एक बार माता सीता अपने मांग में सिंदूर लगा रही थी तभी हनुमान जी भी वहां आये तो उन्होंने माता सीता से प्रसन्न किया की माता आखिर आप हर रोज अपने मांग में ये सिंदूर क्यों लगाती है.
सीता माता ने कहा-“ हनुमान, मैं अपने पति श्रीराम के नाम की सिन्दूर अपने मांग में लगाती हूँ ताकि उनकी उम्र बहुत लंबी हो.”
hanuman जी सोच में पड़ गए और उन्होंने फ़ौरन ही एक थाल सिन्दूर लिया और अपने शरीर पर लगा लिया. उनका पूरा शरीर लाल सिन्दूर के रंग में रंग चूका था.सीता माता यह सब देखकर हंसते हुए बोलीं- हनुमान इसका क्या अभिप्राय है?
हनुमान जी ने उत्तर दिया – “माते, मैंने भी श्रीराम के नाम का सिन्दूर पूरे शरीर भर में लगाया है ताकि उनकी असीम कृपा मुझ पर हमेशा बनी रहे और मेरे प्रभु, मेरे आराध्य की उम्र इतनी लंबी हो कि मेरा सम्पूर्ण जीवन उनकी सेवा में ही बीते.”हनुमान जी के इन वचनों को सुनकर माता सीता का ह्रदय गद्गद् हो उठा. दोस्तों हमें आशा है की आपको ये दोनों hanuman katha पसन्द आयी होगी.

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