mahabharat katha hindi जानिये कैसे अर्जुन बने नपुंशक ?

mahabharat katha hindi, महाभारत की कथा हिंदी में 

जुए में बारह वर्ष का वनवास और एक वर्ष का mahabharat katha hindi अज्ञातवास पाने के बाद पांडव द्रौपदी सहित वन में आ गए . श्री कृष्णा ने पांडवों से कहा की युद्ध तो तय है अतः उन्होंने अर्जुन से दिव्यास्त्रों की खोज में जाने को कहा .

अर्जुन दिव्यास्त्रों की खोज में स्वर्ग लोक की और चल पड़े . वहा देवराज इंद्र ने अर्जुन को सारे दिव्यास्त्र दे दिए . स्वर्ग लोक के गन्धर्व चित्रसेन एक नृत्य गुरु थे . देवराज इंद्रा के mahabharat katha hindi कहेनुसार यदि अर्जुन नृत्य सीख लेंगे तो उन्हें अज्ञातवास में आसानी रहेगी अतः अर्जुन ने उनकी आज्ञा मानके चित्रसेन को गुरु मानकर नृत्य की शिक्षा आरम्भ की .

अर्जुन जैसा शिष्य पाकर चित्रसेन बड़े ही प्रसन्न हो गए तथा अपने नृत्य का संपूर्ण ज्ञान अर्जुन पर उलेड़ दिया . अर्जुन भी अपनी पूरी mahabharat katha hindi लगन से नृत्य सीखने लगे . स्वर्ग लोक की अप्सरा उर्वशी अर्जुन से प्रभावित हो कर वह अर्जुन के नृत्याभ्यास में सहायता करने लगी .

कुछ ही समय पश्चात अर्जुन mahabharat katha hindi नृत्य में निपुर्ण हो गए तथा उन्हने उर्वशी की सहायता के लिए धन्यवाद किया . अर्जुन अपनी नृत्य की शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात वापस लौटने की तयारी करने लगे .

दूसरी तरफ उर्वशी मन ही मन अर्जुन से बहुत प्रभावित हो चुकी थी . उर्वशी को गुमसुम सा देख इंद्र ने उनके मन की बात पूछी तो उर्वशी ने बताया की वे mahabharat katha hindi मन ही मन एक दुविधा में है . इंद्र ने तुरंत दुविधा का निवारण करने की बात की अतः उर्वशी अर्जुन के पास गयी जो उस समय नृत्य का अभ्यास कर रहे थे .

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उर्वशी को देख अर्जुन ने अपना अभ्यास रोक उन्हें प्रणाम किया तथा उनकी सहायता के लिए एक और बार उनका धन्यवाद किया . उर्वशी ने अर्जुन से mahabharat katha hindi अपने मन की बात कहने का प्रयास किया . उन्होंने कहा की उन्होंने अपने जीवन में अर्जुन सा पुरुष कभी नहीं देखा तथा वे उनसे प्रेम करने लगी है .उर्वशी के प्रस्ताव से अर्जुन चकित हो गए .

उन्होंने कहा की उर्वशी उनके लिए आदरणीय है तथा वे उनके बारे में ऐसा सोच नही नहीं सकते . अर्जुन ने उर्वशी से कहा की वे अर्जुन के पूर्वज पुरुरवा के साथ सम्बन्ध रख चुकी है अतः उनका दर्ज अर्जुन की माँ के सामान है . वे उन्हें कुंती के सामान ही पूजनीय है . उर्वशी ने तर्क दिया की mahabharat katha hindi अप्सराएं कभी किसी की माँ नहीं होती अतः अर्जुन को उन्हें स्वकार करना ही पड़ेगा परंतु अर्जुन ने कहा की वे माँ के रूप में उन्हें हमेशा स्वीकार है .

अर्जुन की इस बात से क्रोध्ति होकर उर्वशी ने अर्जुन को नपुंशक होने का श्राप दिया तथा औरतो के बीच में नाचते गाते हुए जीने को कहा . अर्जुन ने उनके mahabharat katha hindi श्राप को खुसी खुसी स्वीकार कर लिया परंतु जब इंद्र को उर्वशी के इस श्राप का पा चला तो उन्होंने उर्वशी को समझाया . उर्वशी को अपनी गलती का पछतावा होने पर उन्होंने अर्जुन के श्राप की अवधि घटा कर एक वर्ष कर दी .

पांडवों के अज्ञातवास के समय अर्जुन ने श्राप का पालन करते हुए विराट राज्य में बृहदला नमक नर्तकी बनकर एक वर्ष तक उत्तर को नृत्य सिखाया .

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