पवित्र मक्का मदीना का इतिहास | Makka Madina History in hindi

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क्या हैं मक्का व् मदीना का रहस्य ?
सऊदी अरब की धरती पर इस्लाम का जन्म हुआ , इसीलिए मक्का और मदीना जैसे तीर्थस्थल उस देश की धरती पर हैं, उन्ही मे से मक्का मे प्रमुख काबा हैं। जिसकी परिक्रमा कर हर मुसलमान धन्यं हो जाता है।

दोस्तों आज हम mecca madina  के इतिहास बारे में mecca madina के कुछ दुर्लभ चित्रों के साथ जानकारी देंगे. मक्का मदीना मुस्लिमो का पवित्र तीर्थ स्थल है जो सऊदी अरब में स्थित है. यह वह स्थान है जहाँ से हज यात्रा आरम्भ होती है. इस्लामी तारीख के अनुसार 10 जिलहज को दुनिया के कोने-कोने से मुसलमान इस पवित्र स्थान पर पहुंचते हैं, जिसे “ईदुल अजहा’ कहा जाता है.


मकका पहुंचने के लिए मुख्य नगर जेद्दाह है। यह नगर एक बंदरगाह भी है और अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्ग का मुख्य केन्द्र भी। जेद्दाह से मक्का जाने वाले मार्ग पर ये निर्देश लिखे होते हैं कि यहां मुसलमानों के अतिरिक्त किसी भी और धरम का व्यक्ति प्रवेश नहीं कर सकता। सूचनाएं अरबी भाषा में लिखी होती हैं, जिसे अन्य देशों के लोग बहुत कम जानते हैं. mecca madina का इतिहास  बहुत ही प्राचीन है|

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क्या मक्का मदीना पहले मक्केश्वर महादेव मंदिर था ?

मुसलमानों के सबसे बड़े तीर्थ मक्का के बारे में कहते हैं कि वह मक्केश्वर महादेव का मंदिर था। वहां काले पत्थर का विशाल शिवलिंग था जो खंडित अवस्था में अब भी वहां है। हज के समय संगे अस्वद (संग अर्थात पत्थर, अस्वद अर्थात अश्वेत यानी काला) कहकर मुसलमान उसे ही पूजते और चूमते हैं। इसके बारे में प्रसिद्ध इतिहासकार स्व0 पी.एन.ओक ने अपनी पुस्तक ‘वैदिक विश्व राष्ट्र का इतिहास’ में बहुत विस्तार से लिखा है


रावण आकाशमार्ग से लंका की ओर जाता है पर रास्ते में कुछ ऐसे हालत बनते हैं की रावण को शिवलिंग धरती पर रखना पड़ता है। वह दुबारा शिवलिंग को उठाने की कोशिश करता है पर खूब प्रयत्न करने पर भी लिंग उस स्थान से हिलता नहीं। वेंकतेश पण्डित के अनुसर यह स्थान वर्तमान में सऊदी अरब makka madina नामक स्थान पर स्थित है। सऊदी अरब के पास ही यमन नामक राज्य भी है जहाँ श्री कृष्ण ने कालयवन नामक राक्षस का विनाश किया था। परन्तु mecca madina ki history से जुडी यह बात में कितनी सच्चाई है यह अभी तक के रहस्य ही बना है.

मक्का मदीना के इतिहास में यह बात भी है अनोखी

क्यों वर्जित है मक्का में गैर मुस्लिमों का प्रवेश?

mecca madina के इतिहास में यह भी अनोखी बात है जो अब चली आ रही है की मक्का मदीना में गैर मुस्लिमो को प्रवेश की अनुमति नहीं है.जैसे सभी नागरिकों को कन्टोन्मेंट एरिया (सैनिक छावनी) में जाने की अनुमति नहीं होती वैसे ही हर देश में कुछ न कुछ ऐेसे क्षेत्र अवश्य होते हैं जहाँ सामान्य जनता को जाने की इजाज़त नहीं होती हैं। सैनिक छावनी में केवल वही लोग जा सकते हैं जो सेना अथवा प्रतिरक्षा विभाग से जुड़ें हों। इसी प्रकार इस्लाम के दो नगर मक्का और मदीना किसी सैनिक छावनी के समान महत्वपूर्ण और पवित्र हैं, इन नगरों में प्रवेश करने का उन्हें ही अधिकार है जो इस्लाम में विश्वास रखते हो।

काबा का पवित्र झरना- प्रसिद्व अवधारणाएं
आज भी यह प्रथा हैं, मुस्लिम श्रद्धालु हज़्ज़ के दौरान इस आबे जमजम को अपने साथ बोतल मे भरकर ले जाते हैं। ऐसा कुम्भ के दौरान भी देखा जाता है, कुम्भ मे शामिल होने वाले हिन्दुओ द्वारा गंगाजल को बोतलों मे भरकर ले जाते है तथा इसी प्रकार हज मे शामिल होने वाले मुसलमानो की भी ऐसी समानता है।

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प्रसिद्ध अवधारणाएं काबा के पवित्र झरना से जुडी हुई।

काबा से जुडी हुई एक और अवधारणा है- “पवित्र गंगा”। जैसा कि हम सभी जानते है कि भारतीय संस्कृति में शिव के साथ गंगा और चन्द्रमा के रिश्ते को कभी अलग नहीं किया जा सकता, जहां शिव होंगे ,वहा पवित्र गंगा की मौजूदगी निश्चित है। काबा के पास भी एक प्रमुख झरना पाया जाता है , इसका पानी भी गंगा की तरह पवित्र माना जाता है , इसको इस्लामिक काल से पहले भी पवित्र (आबे ज़मज़म) ही माना जाता था।

काबा
प्राचीन काल से ही मक्का धर्म तथा व्यापार का लम्बे अरसे से केंद्र रहा है, यहाँ पर पत्थरों से निर्मित एक विशाल मस्जिद मौजूद है व जिसके मध्य भूभाग में ग्रेनाइट पत्थर से बना आयताकार काबा भी स्थित है, जो कि 40 फुट लंबा तथा 33 फुट चौड़ा है एवम इसमें कोई खिड़की नहीं है, बल्कि एक दरवाज़ा है जोकि काबा के पूर्वी कोने में ज़मीन से लगभग पाँच फुट की ऊँचाई पर पवित्र काला पत्थर पर स्थित है तथा मुस्लिम यात्री यहाँ आकर काबा के सात चक्कर लगाते हैं, उसके बाद इसको चूँमते हैं।

mecca madina shivling

गुरु नानकजी ने मक्का में प्रवेश किया था ?

सिख धर्म के पहले गुरु गुरुनानक जी ने जीवन भर हिन्दू और मुस्लिम धर्म की एकता का सन्देश दिया, यातायात के बेहद कम साधनों वाले उस दौर में पूरे भारत ही नहीं बल्कि समस्त विश्व आधुनिक इराक के बगदाद और सउदी अरब के मक्का मदीना तक यात्रा की थी।

मक्का मदीना में प्रवेश और वीसा की शर्त

makka madina का वीसा अथवा वहाँ प्रवेश करने की बुनियादी शर्त यह है कि मुख से ‘‘ला इलाहा इल्लल्लाहु, मुहम्मदुर्रसूलल्लाहि’’ (कोई ईश्वर नहीं, सिवाय अल्लाह के (और) मुहम्मद (सल्लॉ) अल्लाह के सच्चे सन्देष्टा हैं), कहकर मन से अल्लाह के एकमात्र होने का इकष्रार किया जाए और हज़रत मुहम्मद (सल्लॉ) को अल्लाह का सच्चा रसूल स्वीकार किया जाए.

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