2018 Papmochani Ekadashi Vrat Aur Puja Vidhi पापमोचनी एकादशी व्रत और पूजा विधि

होलिका दहन और चैत्र नवरात्र के बीच जो एकादशी आती हैं उसे पापमोचिनी एकादशी (Papmochani Ekadashi)कहते हैं. पापमोचिनी एकादशी हिन्दू वर्ष (विक्रम सम्वत ) की यह अंतिम एकादशी मानी जाती हैं पापमोचिनी एकादशी बहुत ही पुण्यवान मानी जाती हैं, जाने अनजाने हमसे यदि कोई पाप हो जाता हैं तो पापमोचिनी एकादशी द्वारा प्रायश्चित किया जाता हैं. इस वर्ष पापमोचिनी एकादशी(Papmochani Ekadashi) 13 मार्च मंगलवार को हैं,आइये जानते हैं  व्रत और पूजन विधि:

Papmochani Ekadashi Vrat Puja Vidhi पापमोचिनी एकादशी व्रत पूजा

विधि:

पापमोचिनी एकादशी का व्रत विष्णु भगवान के नाम से ही किया जाता हैं .इस दिन भगवान् विष्णु की पूजा की जाती हैं. और पापमोचिनी एकादशी व्रत को विधिपूर्वक करना चाहिए ,व्रत का परायण करने से पूर्व पापमोचिनी एकादशी व्रत कथा सुनी जाती हैं.

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शालिग्राम भगवान् विष्णु का स्वरुप माना गया है। पुराणों में तो यहां तक कहा गया है कि जिस घर में भगवान शालिग्राम हो, वह घर समस्त तीर्थों से भी श्रेष्ठ है। इनके दर्शन व पूजन से समस्त भोगों का सुख मिलता है।
दैनिक पूजन में श्री शालिग्राम जी को स्नान कराकर चन्दन लगाकर तुलसी दल अर्पित करना और चरणामृत ग्रहण करना। यह उपाय मन, धन व तन की सारी कमजोरियों व दोषों को दूर करने वाला माना गया है।


एकादशी के दिन प्रात:काल विष्णु की पूजा करे ,और घी का दीपक जलाये .और विष्णु के समक्ष हाथ जोड़कर पापो से मुक्ति के लिए प्रार्थना करते हुए ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करे. हरि को स्मरण करते हुए हरि के भजन रात्रि जागरण करे ,अगले दिन कथा सुनने के बाद व्रत का परायण करे

Papmochani Ekadashi Vrat Katha  पापमोचिनी एकादशी व्रत कथा :

चित्ररथ नामक वन में मेधावी ऋषि कठोर तप में लीन थे। उनके तप से देवराज इन्द्र चिंतित हो गए और उन्होंने ऋषि की तपस्या भंग करने हेतु मंजुघोषा नामक अप्सरा को पृथ्वी पर भेजा। तप में विलीन मेधावी ऋषि ने जब अप्सरा को देखा तो वह उस पर मन्त्रमुग्ध हो गए और अपनी तपस्या छोड़ कर मंजुघोषा के साथ वैवाहिक जीवन व्यतीत करने लगे।

कुछ वर्षो के पश्चात मंजुघोषा ने ऋषि से वापस स्वर्ग जाने की बात कही। तब ऋषि को यह बोध हुआ कि वे शिव भक्ति के मार्ग से हट गए और उन्हें स्वयं पर ग्लानि होने लगी। क्रोधवश मेधावी ऋषि ने मंजुधोषा को पिशाचिनी होने का शाप दिया। इस बात से मंजुघोषा को बहुत दुःख हुआ और उसने ऋषि से शाप-मुक्ति के लिए प्रार्थना करी। चूँकि मेधावी ऋषि ने भी शिव भक्ति को बीच राह में छोड़कर पाप कर दिया था, उन्होंने भी अप्सरा के साथ पापमोचिनी  एकादशी (Papmochani Ekadashi) व्रत को विधि-विधान से किया और अपने पाप से मुक्त हुए।

Papmochani Ekadashi Muhurt   पापमोचिनी एकादशी मुहूर्त

एकादशी व्रत तिथि :13 मार्च 2018
एकादशी तिथि प्रारम्भ :11:13 बजे (12 मार्च 2018)
एकादशी तिथि समाप्त = 13:41 बजे (13 मार्च 2018)
एकादशी व्रत तिथि – 13 मार्च 2018
परायण का समय – 06:36 से 08:57 बजे (14 मार्च 2018)

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