4 गलतियाँ, यदि इन्हें किया शाम के समय, तो कोई नहीं बचा सकता आपको विनाश से

शाम होते ही कितनी बार हमने हमारे बुज़ुर्गो को कई काम करने से टोका होगा, लेकीन हमने बहुत ही कम बार उनकी बातों पर ध्यान दिया होगा, ये माना जाता है शाम के समय कुछ करना वर्जित माना जाता है जिनके करने से देवी-देवता रुष्ट हो जाते है |

आज की पीढ़ी इन सब मान्यताओ को अपनी जीवन शैली मई अपनाना भूल गयी है लकिन इसका मतलब ये नहीं है के पुराणिक ग्रंथो की मान्यता कम हो गयी है |तो आज हम आपको यही बताने जा रहे है के शास्त्रो और पुराणों के अनुसार शाम के वक़्त क्या नहीं करना चहिये |

शाम के वक़्त हमे कभी भी तुलसी पर जल नहीं चढ़ाना चहिये | शाम के समय न ही तुलसी को जल चढ़ाना चहिये न ही तुलसी के पत्ते को तोड़ना चहिये | तुलसी को जल चढ़ाने का सही समय सुबह का है |

सुबह तुलसी पर जल चढ़ाने से घर मे सुख समृद्धि आती है | लकिन शाम को तुलसी को चुना तक नहीं चहिये |

शाम के समय कभी भी घर मे झाड़ू नहीं लगाना चहिये , ध्यान रखे शाम को झाड़ू न लगाए ऐसा करने से घर से सकारात्मक ऊर्जा बहार निकल जाती है और घर मे दरिद्रता आती है | इसी लिए शाम होने से पहले ही घर को साफ कर लेना चहिये |

शाम के समय कभी भी सोना नहीं चहिये | शाम के समय सोना सेहत के लिए अच्छी नहीं माना जाता , कहा जाता है के जो लोग शाम के समय सोते है वो मोटापे का शिकार होते है | कवेल जो लोग बीमार हो , बुज़ुर्ग और गर्भवती महिलाए ही शाम के समय सो सकते है | शाम को सोने से आलास बढ़ता है और जिस घर के लोग शाम को सोते है उनके घर लक्ष्मी माँ निवास नहीं करती |

शाम का समय पूजा अर्चना के लिए होता है इसी लिए घर का वातावरण भी धार्मिक और पवित्र रखना चहिये | इसलिए विवाहित जोड़ो को कभी भी शाम के समय सम्बन्ध नहीं बनाने चहिये |इस काम के लिए रात का समय ही सर्वश्रेष्ठ रहता है। सम्बन्ध बनाने से शरीर की पवित्रता खत्म हो जाती है , इस लिए शाम के समय इस काम से बचे |

वैसे तो हमे दिन के किसी भी समय किसी की भी चुगली नहीं करनी चहिये न ही किसी को बुरा बोलना चहिये लकिन शाम के समय खासकर हमे न ही किसी की चुगली करनी चाहिए न ही बुरा बोलना चहिये | बहुत से लोगो को दूसरे की बुराई करने में मज़ा आता है लकिन इससे उनके अंदर की ही बुराई दिखती है और उनकी सोच का पता चलता है | ऐसे कामो से उनकी समाज इज़्ज़त भी कम होती है|

इसी लिए हमे कभी भी किसी की बुराई नहीं करनी चाहिए और न ही किसी ओर के मुँह से दूसरे की बुराई सुन्नी चहिये , ऐसे चीज़ों से हमेशा बच के ही रहना चहिये |

अंततः हम चाहे जो भी सोचे किन्तु हमारे धार्मिक ग्रंथो ओर शास्त्रो में जो लिखा है उसकी आज भी उतनी ही मान्यता है जितनी पहले के समय में हुआ करती थी |