सूपर्णखा थी मीनाक्षी नाम की एक सुन्दर कन्या, ब्र्ह्मा के वरदान से प्राप्त हुए थे अगले जन्म में श्री राम पति के रूप में !

सूपर्णखा को रामायण की कथा में एक दुष्ट राक्षसी के रूप में दिखाया गया है, पर शायद ही आप सूपर्णखा के वास्तविक सच्चाई को जानते होंगे. वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण में सूपर्णखा को एक डरावनी एवं पागल महिला के रूप में प्रस्तुत किया गया है.

परन्तु सूपर्णखा से जुडी बहुत से ऐसी बाते थी जिनका वाल्मीकि रामायण में कहि कोई जिक्र नहीं मिलता है .

सूपर्णखा के पिता का नाम मह्रिषी विश्रवा था तथा उनकी माता कैकसी थी. महापंडित रावण सूपर्णखा के ज्येष्ठ भ्राता थे , तथा वह अपने भाइयो में सबसे छोटी व उनकी एकमात्र बहन थी. रामायण से संबंधित अनेको हिन्दू धार्मिक ग्रंथो में बताया गया है की सूपर्णखा अपनी माता के समान ही बहुत सुन्दर थी.

सूपर्णखा की आँखे मछली के समान आकर्षक थी, इसी कारण बचपन में उसके माता पिता ने उसका नाम मीनाक्षी रखा था.

सूपर्णखा से जुड़े कुछे विचित्र रहस्य :-

1 . क्या वास्तव में सूपर्णखा का रूप भयावाह था :-

वाल्मीकि रामायण के अनुसार सूपर्णखा के भयावाह रूप का वर्णन करते हुए बताया गया है की संसार में सबसे ज्यादा भयानक राक्षसी थी. उसकी आवाज अत्यधिक डरावनी एवं कर्कश थी. उसके बहुत ही बड़े नाख़ून एवं विशाल फैले हुए बाल थे.

उसे अनेक मायावी शक्तियों का ज्ञान था, अपने इशारे से वह तेज वर्षा करा सकती थी एवं आधी ला सकती थी. वह किसी भी प्रकार के रूप को धारण करने में माहिर थी, वह भगवान राम एवं लक्ष्मण के पास एक सुन्दर कन्या में परिवर्तित होकर पहुंची थी.

जबकि तमिल के प्रसिद्ध ग्रन्थ कम्बन रामायण के अनुसार सूपर्णखा के एक रूपवान एवं बहुत ही सुन्दर कन्या बतलाया गया है . हम इस रामायण में सूपर्णखा के रूप के बारे में उल्लेखित बातो को झूठ मान कर परे नहीं कर सकते क्योकि इसमें सूपर्णखा का वास्तविक नाम मीनाक्षी ( मछली के समान आँखे वाली आकर्षक कन्या ) बताया गया है. जबकि वाल्मीकि रामायण में भी यह जिक्र मिलता है की सूपर्णखा के माता पिता ने उसका नाम मीनाक्षी रखा था.

2 . वास्तविकता में सूपर्णखा का इरादा राम को पति के रूप में पाना का नहीं था :-

सूपर्णखा का कोई ऐसा इरादा नहीं था जिससे माता सीता दुखी हो. वह भगवान राम एवं लक्ष्मण को पति के रूप में पाना नहीं चाहती थी. तो फिर आखिर क्यों सूपर्णखा ने भगवान श्री राम एवं लक्ष्मण के आगे विवाह का प्रस्ताव रखा ? अनेको ग्रंथो में इस प्र्शन का एक तर्कसंगत जवाब मिलता है.

दरअसल सूपर्णखा का विवाह दुष्टबुद्धि के साथ हुआ था जो लंकापति रावण के दरबार में मंत्री था. रावण ने सूपर्णखा के पति दुष्टबुद्धि का वध कर दिया जिससे सूपर्णखा को गहरा आघात पहुंचा. तथा उसने रावण के सर्वनाश की प्रतिज्ञा ली. परन्तु इसके लिए सूपर्णखा को अनेक वर्षो तक इंतज़ार करना पडा .

जब सूपर्णखा को यह बात पता लगी एक राम नाम के साधारण मनुष्य ने उसकी दादी (ताड़िका ) का वध कर दिया है तो वह समझ गई की राम ही एक ऐसे व्यक्ति है जो रावण का वध कर सकते है.

अतः वह भगवान राम एवं लक्ष्मण के पास पहुंच कर स्वांग रचने लगी, वास्तव में उसका आकर्षण भगवान राम एवं लक्ष्मण के प्रति नहीं था.

उसने लक्ष्मण के हाथो से अपने नाक कटवाई तथा रावण के पास जाकर रावण एवं राम की बीच दुश्मनी का बीज बोया.

3 . अंत में सूपर्णखा को प्राप्त हुआ था भगवान श्री राम से विवाह करने का अवसर :-

शायद ही इस रहस्य को कोई जनता हो परन्तु प्रसिद्ध ग्रन्थ ब्रह्मवेव्रता पुराण के अनुसार सूपर्णखा ने भगवान राम को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या करी थी. ब्र्ह्मा ने वरदान स्वरूप सूपर्णखा को उसके अगले जन्म में उनकी पत्नी होने का वरदान दिया था.

सूपर्णखा अगले जन्म में कुब्जा के रूप में उतपन्न हुई , अपने इस जन्म वह कुबड़ी थी. वह भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण के प्रति अगाध शृद्धा रखती थी. भगवान श्री कृष्ण जब अपने मामा कंश के वध के लिए मथुरा आये थे तो उन्होें कुब्जा को उसके रोग से मुक्ति दिलाई थी तथा वह एक सुन्दर कन्या में परिवर्तित हो गई थी.

सूपर्णखा भगवान कृष्ण की 16008 पत्नियों में से एक थी.

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