सोने की नगरी कहि जाने वाली रावण की लंका के बारे में ये अनोखी बाते शायद नहीं जानते होंगे आप !

सोने की लंका का निर्माण तथा उससे जुड़े कुछ रोचक तथ्य..

सोने एवं असंख्य रत्नो से जड़ी लंका नगरी का राजा रावण था तथा इस नगरी को हनुमान जी ने अपनी पूछ से आग लगा कर जला दिया था.

आज भी रावण की इस नगरी के अनेको ऐसे साक्ष्य श्रीलंका में मिलते है जो रावण की लंका की भव्यता के बारे में वर्णन करते है. आज हम आपको रावण के सोने की लंका से जुडी कुछ ऐसी बाते बताने जा रहे है जो शायद ही आप ने पहले कभी पढ़ी और सुनी हो.

महादेव शिव ने माता पार्वती के रहने के लिए एक स्वर्ण के महल का निर्माण करवाया जिसका कार्य शिव ने स्वर्ग के देवशिल्पी विष्वकर्मा के हाथो सौपा. कुछ ही दिनों में विष्वकर्मा ने एक बहुत अद्भुत एवं भव्य महल ‘‘सोने की लंका” का निर्माण कर दिया. परन्तु जब महादेव शिव ने इस महल के गृहप्रवेश के लिया महापंडित रावण को बुलाया तो उसने छल से महादेव से सोने की लंका हड़प ली.

ravan ki lanka

यह सोने की लंका त्रिकुटाचल पर्वत पर बनाई गई थी . त्रिकुटाचल दो शब्दों से मिलकर बना है जिसमे त्रि यानि तीन तथा अकुटाचल का मतलब होता है पर्वत. सोने की लंका तीन पर्वतो के श्रृंखलाओं पर स्थित थी.

पहले पर्वत का नाम सुबेल था जहां रामायण(Ramayan) का युद्ध सम्पन्न हुआ था, दूसरे पर्वत का नाम नील था जहां पर सोने की लंका स्थापित थी तथा तीसरा एवं अंतिम भाग था सुन्दर पर्वत जहां अशोक वाटिका स्थित थी. यही पर माता सीता को रावण ने कैद किया था व हनुमान जी की माता सीता से पहली भेट हुई थी.

रामायण में सोने की लंका के भव्यता का वर्णन करते हुए बताया गया है की जब हनुमान माता सीता की खोज करते हुए सोने की लंका में पहुंचे तो इस महल की सुंदरता का अवलोकन करते हुए वे एक सुंदर गृह में जा पहुंचे जो राक्षस राज का निजी निवास था.

चार दांत एवं तीन दांत वाले हाथी उस भवन को चारो तरफ से घेरे हुए थे. रावण का वह महल उसकी राक्षस जातियों की पत्नियों और हर कर लाई हुई राज कन्याओं से भरा था. रावण के उस महल की भव्यता अद्भुत थी.

महल के अंदर अनेक गुप्त गृह और मंगल गृह बने हुए थे. उस लम्बे-चोडे भवन में महल के बीच के भाग में पुष्पक विमान रखा हुआ था. इस महल का निर्माण बहुत सुन्दर ढंग से किया गया था. वह भवन मतवाले हाथियों से युक्त था.

विष्वकर्मा ने बहुत ही दक्षता के साथ इस भवन का निर्माण किया था. सोने और स्फटिक की खड़िया इस महल के दीवारों पर चार-चाँद लगा रही थी. तथा इस महल फर्श बेशकीमती मोतियों एवं रत्नो से जड़ित था.

श्रीलंका की श्रीरामायण रिसर्च कमेटी के अनुसार रावण के चार हवाई अड्डे थे. उनके चार हवाई अड्डे ये हैं- उसानगोड़ा, गुरुलोपोथा, तोतूपोलाकंदा और वारियापोला.

 

ravan ki photo

इन चार में से एक उसानगोड़ा हवाई अड्डा नष्ट हो गया था. कमेटी अनुसार सीता की तलाश में जब हनुमान(Hanuman) लंका पहुंचे तो लंका दहन में रावण का उसानगोड़ा हवाई अड्डा नष्ट हो गया था.

पुष्पक विमान के विशेषता :- पुष्पक विमान की यह विशेषता थी की इसे किसी भी आकर का किया जा सकता था अर्थात इस विमान को मन की इच्छा के अनुसार बढ़ाया और घटाया जा सकता था. मन की इच्छानुसार गति होती थी और इसमें बहुत से लोगो को यात्रा करवाने की क्षमता थी.

यह विमान स्वामी के इच्छानुसार आकाश में भर्मण करता था अर्थात इसे मन के अनुसार दिशा दी जा सकती और किसी भी दिशा में घुमाया जा सकता था.

बताया जाता की है वर्तमान में शोधकर्ताओं को रामायण कालीन सोने की लंका के अनेको चीज़ एवं स्थान मिले है. खुद नासा ने रामसेतु की इनसेट पिक्चर भेज भारतीय संस्कृति की परिकल्पना को मूर्त रूप दिया है. ऐसे में अभी भी अनेक ऐसे रहस्य है जिनसे निकट भविष्य में पर्दा उठ सकता है.

हालही के वर्षो में समुन्द्र तल में कृष्ण की द्वारिका नगरी के मिलने से यह प्रमाणित होता है की अभी भी हम अनेको ऐसे रहस्यों से अंजान है जो इतिहास में दबे हुए है और हमारे धार्मिक एवं पौराणिक ग्रंथो की सत्यता को प्रमाणित करते है.

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